आगरा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए मसाला उत्पादों की जांच की। दयालबाग और खेरागढ़ स्थित प्रतिष्ठानों से आठ विधिक नमूने लिए गए, जबकि करीब 410 किलोग्राम खाद्य पदार्थ सीज किए गए। सभी नमूनों को जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावटखोरी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का विशेष प्रवर्तन अभियान लगातार जारी है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ तथा जिलाधिकारी के निर्देश पर गुरुवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर सघन निरीक्षण करते हुए मसाला उत्पादों की जांच की। इस दौरान आठ विधिक नमूने संग्रहित किए गए, जबकि 409.9 किलोग्राम खाद्य पदार्थ सीज किए गए।

अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम सबसे पहले दयालबाग क्षेत्र के खासपुर स्थित एम/एस सूरजी स्पाइसेज पहुंची। यहां मसाला उत्पादों के निर्माण, भंडारण और गुणवत्ता संबंधी मानकों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान धनिया पाउडर, साबुत जीरा, हल्दी पाउडर, सेंधा नमक, स्नैक्स मसाला, पिज्जा ओरेगानो और सलाद मसाला के कुल सात विधिक नमूने संग्रहित किए गए। इन सभी नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सील कर परीक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया।
निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ भी सीज किए गए। विभागीय टीम ने 300 किलोग्राम सेंधा नमक, 53.9 किलोग्राम हल्दी पाउडर और 56 किलोग्राम धनिया पाउडर को अपने कब्जे में लिया। इस प्रकार कुल 409.9 किलोग्राम खाद्य सामग्री अभिग्रहित (सीज) की गई, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 48,980 रुपये बताई गई है। विभाग के अनुसार इन उत्पादों की गुणवत्ता और मानकों की पुष्टि होने तक इन्हें बाजार में बिक्री के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
इसके बाद टीम ने खेरागढ़ क्षेत्र के जगनेर स्थित एस.के. गोयल सेल्स का निरीक्षण किया। यहां से गरम मसाले का एक विधिक नमूना संग्रहित किया गया। इस तरह पूरे अभियान के दौरान जनपद में कुल आठ विधिक नमूने एकत्र किए गए।
विभाग ने बताया कि सभी नमूनों को परीक्षण के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। यदि जांच में किसी भी प्रकार की मिलावट, गुणवत्ता में कमी या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उससे संबंधित नियमावली के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण और नमूना संग्रहण से मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
विभाग ने जनपद के सभी खाद्य कारोबारियों से अपील की है कि वे केवल मानक और सुरक्षित खाद्य पदार्थों का ही निर्माण, भंडारण और विक्रय करें। साथ ही खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के सभी प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें, ताकि उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री पहुंच सके और किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की नौबत न आए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का विशेष प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जिले के विभिन्न बाजारों, गोदामों, निर्माण इकाइयों और प्रतिष्ठानों पर नियमित निरीक्षण किए जाएंगे। जहां भी खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या मिलावट की आशंका मिलेगी, वहां नियमानुसार नमूने लिए जाएंगे और आवश्यकतानुसार खाद्य पदार्थों को सीज करने के साथ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या शुद्धता को लेकर संदेह हो तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
