फतेहाबाद। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा-21 पर टोल मैनेजर के साथ कथित गाली-गलौज और अभद्रता के मामले में चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस कार्रवाई के विरोध में कर्मचारियों ने धरना देकर टोल संचालन रोक दिया, जिससे करीब डेढ़ घंटे तक वाहन बिना टोल दिए गुजरते रहे। टोल प्रबंधन के अनुसार इस दौरान लगभग 700 वाहन निकले, जिससे 7 से 8 लाख रुपये का नुकसान हुआ। पुलिस ने चारों कर्मचारियों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की, जबकि टोल प्रबंधन ने उन्हें सेवा से हटा दिया।
फतेहाबाद स्थित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा-21 पर सोमवार देर रात कर्मचारियों और टोल प्रबंधन के बीच विवाद के बाद हंगामे की स्थिति बन गई। टोल मैनेजर के साथ कथित रूप से शराब के नशे में गाली-गलौज और अभद्रता करने के आरोप में चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा चारों कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में अन्य कर्मचारी धरने पर बैठ गए और टोल संचालन प्रभावित हो गया। इसके चलते करीब डेढ़ घंटे तक सैकड़ों वाहन बिना टोल दिए एक्सप्रेसवे से गुजरते रहे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कार्यरत टोल कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पहले टोल प्रबंधन को ज्ञापन दिया था। कर्मचारियों की ओर से नियमित आठ घंटे की ड्यूटी, सप्ताह में एक साप्ताहिक अवकाश तथा नियमानुसार मानदेय दिए जाने की मांग की गई थी। टोल प्रबंधन ने इन मांगों पर विचार करने के बाद इन्हें स्वीकार कर लिया था और जुलाई माह से नई व्यवस्था लागू कर दी गई थी।
बताया गया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ कर्मचारी इससे असहमत थे और इसका विरोध कर रहे थे। इसी क्रम में सोमवार शाम एक कर्मचारी ने टोल कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप पर इस व्यवस्था के विरोध में फांसी लगाने की धमकी दी। सूचना मिलने पर टोल प्लाजा-21 के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमोद कुमार धनगर मौके पर पहुंचे और संबंधित कर्मचारी सहित अन्य कर्मचारियों को समझाने का प्रयास करने लगे।
इसी दौरान आरोप है कि चार कर्मचारी शराब के नशे में वहां पहुंचे और प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमोद कुमार धनगर के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख टोल मैनेजर ने तत्काल थाना फतेहाबाद पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपित चार कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया।
पुलिस द्वारा चार कर्मचारियों को ले जाने की जानकारी मिलते ही अन्य कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने टोल संचालन बंद कर धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान टोल प्लाजा के बूम बैरियर हटा दिए गए, जिससे रात करीब 12 बजे से 1:30 बजे तक वाहन बिना टोल दिए गुजरते रहे। इस दौरान एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रूप से चलता रहा और किसी भी वाहन से टोल शुल्क नहीं लिया गया।
टोल प्रबंधन के अनुसार करीब डेढ़ घंटे की इस अवधि में लगभग 700 वाहन बिना टोल दिए निकल गए। इससे टोल संचालन करने वाली कंपनी को लगभग 7 से 8 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। बाद में टोल प्रबंधन ने कर्मचारियों से बातचीत की और उन्हें समझाया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ तथा टोल संचालन दोबारा सामान्य हो सका।
इस मामले में टोल प्लाजा-21 के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमोद कुमार धनगर की तहरीर पर थाना फतेहाबाद में चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद कर्मचारियों में सचिन गोस्वामी पुत्र शिवशंकर, निवासी दीनूकी, थाना टूंडला, जनपद फिरोजाबाद; हरिगोविन्द सिंह पुत्र स्वरूप सिंह, निवासी बिरेहरू, थाना सैंया, जनपद आगरा; दिलीप पाण्डेय पुत्र रमेश बाबू पाण्डेय, निवासी सेमरा अतिकाबाद, थाना सिरसागंज, जनपद फिरोजाबाद तथा राजू यादव पुत्र शान्तिलाल, निवासी मलगांव, थाना सकीट, जनपद एटा शामिल हैं।
पुलिस ने चारों कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही शांतिभंग की कार्रवाई भी की। वहीं टोल प्रबंधन ने चारों कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया है।
प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमोद कुमार धनगर ने बताया कि कर्मचारियों द्वारा पहले दिए गए मांगपत्र पर उच्चाधिकारियों ने विचार करते हुए नियमित आठ घंटे की ड्यूटी, साप्ताहिक अवकाश और नियमानुसार मानदेय की व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके बावजूद कुछ कर्मचारी इसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सोमवार रात एक कर्मचारी द्वारा आत्महत्या की धमकी दिए जाने की सूचना मिलने पर वह पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे थे और कर्मचारी को समझा रहे थे। इसी दौरान चार कर्मचारी, जो कथित रूप से शराब के नशे में थे, उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस ने चारों को हिरासत में ले लिया।
उन्होंने बताया कि पुलिस कार्रवाई के बाद अन्य कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप टोल संचालन रोक दिया और बूम बैरियर हटा दिए, जिसके कारण रात 12 बजे से 1:30 बजे तक लगभग 700 वाहन बिना टोल दिए निकल गए। इससे टोल प्रबंधन को करीब 7 से 8 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम के बाद प्रबंधन ने चारों कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है।

