आगरा। मुख्यमंत्री शहरी सड़क उन्नयन योजना (सीएम ग्रिड) के तहत आगरा की पांच प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मनीष बंसल ने धीमी प्रगति पर कड़ा रुख अपनाया। हरीपर्वत-रवि हॉस्पिटल-राजामंडी स्टेशन मार्ग और टेढ़ी बगिया-कालिंदी विहार सड़क परियोजना की अपेक्षा से कम प्रगति पर संबंधित निर्माण एजेंसियों और कंसल्टेंट फर्मों को फटकार लगाते हुए तय समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग, अतिक्रमण हटाने और सभी विभागों के समन्वय से कार्य में तेजी लाने को कहा।

मुख्यमंत्री शहरी सड़क उन्नयन योजना (सीएम ग्रिड) के तहत आगरा शहर की प्रमुख सड़कों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा मंगलवार को स्मार्ट सिटी सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में नगर निगम, निर्माण एजेंसियों, कंसल्टेंट फर्मों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ पांचों प्रस्तावित मॉडल सड़कों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। समीक्षा के दौरान जिन परियोजनाओं में कार्य की गति संतोषजनक नहीं मिली, वहां जिलाधिकारी ने निर्माण एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी ने सीएम ग्रिड योजना के तहत निर्माणाधीन सभी मॉडल सड़कों की विस्तृत जानकारी तलब की। उन्होंने प्रत्येक परियोजना की लंबाई, निविदा जारी होने की तिथि, टेंडर प्रक्रिया, स्वीकृत धनराशि, ठेकेदार के साथ हुए अनुबंध, अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा करने की समय सीमा, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा कंसल्टेंट फर्मों की भूमिका की अलग-अलग समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा के दौरान सबसे पहले हरीपर्वत से रवि हॉस्पिटल तथा दिल्ली गेट से राजामंडी स्टेशन तक 1.25 किलोमीटर लंबे समेकित विकास एवं सड़क उन्नयन कार्य की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना की कुल भौतिक प्रगति अभी केवल 15 प्रतिशत है। वहीं ट्रेंचिंग का कार्य, जो इस समय तक पूरी तरह समाप्त हो जाना चाहिए था, वह मात्र 16 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है।
इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित ठेकेदार फर्म राम कंस्ट्रक्शन और कंसल्टेंट फर्म के प्रतिनिधियों को बैठक में तलब कर जवाब मांगा। उन्होंने इतनी कम प्रगति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कार्य की रफ्तार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ठेकेदार की ओर से बताया गया कि राजामंडी स्टेशन मार्ग पर भूमिगत यूटिलिटी से जुड़े अधिकांश कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं और जल्द ही सड़क निर्माण में तेजी लाई जाएगी। वहीं हरीपर्वत से रवि हॉस्पिटल मार्ग पर पुलिस विभाग से एनओसी मिलने में देरी तथा मार्ग में अतिक्रमण के कारण निर्माण प्रभावित हुआ है।
जिलाधिकारी ने इन कारणों को सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य अभियंता (सिविल) को निर्देशित किया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पुलिस विभाग से लंबित एनओसी शीघ्र प्राप्त की जाए और सड़क किनारे मौजूद अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि अनुबंध के अनुसार निर्माण स्थल पर पर्याप्त मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा में परियोजना पूरी हो सके।
उन्होंने नगर निगम के जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंताओं को प्रत्येक सड़क परियोजना की नियमित निगरानी करने, निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि समय सीमा में कार्य पूरा करना सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में इसके बाद टेढ़ी बगिया से कालिंदी विहार एनएच-19 सर्विस रोड तक 2.88 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना की भौतिक प्रगति अभी केवल 10 प्रतिशत है। निर्माण कार्य धीमी गति से चलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित निर्माण एजेंसी कोणार्क एसोसिएट को भी बैठक में बुलाकर जवाब मांगा।
निर्माण एजेंसी की ओर से प्रस्तुत जवाब से असंतुष्ट जिलाधिकारी ने मौके पर तैनात अभियंताओं और कार्यस्थल पर उपलब्ध मैनपावर की जानकारी ली। समीक्षा में पाया गया कि अनुबंध में निर्धारित संख्या की तुलना में कम श्रमिक और तकनीकी स्टाफ कार्यस्थल पर मौजूद हैं। इस पर जिलाधिकारी ने निर्माण एजेंसी को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि कार्य की गति और गुणवत्ता में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कोणार्क एसोसिएट को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल पर तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए तथा कार्य को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। इसके अलावा नगर निगम से एक सहायक नगर आयुक्त को परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग के लिए नामित करने के निर्देश भी दिए, ताकि प्रतिदिन कार्य की समीक्षा की जा सके।
जिलाधिकारी ने दोनों परियोजनाओं के निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहा है वहां पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि आम नागरिकों और वाहन चालकों को किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना का सामना न करना पड़े।
उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर थर्ड पार्टी से भी परीक्षण कराया जाए। उनका कहना था कि सरकार की मंशा केवल सड़क निर्माण कराना नहीं, बल्कि ऐसी गुणवत्तापूर्ण सड़कें तैयार करना है जो लंबे समय तक टिकाऊ रहें और नागरिकों को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध करा सकें।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री शहरी सड़क उन्नयन योजना के अंतर्गत विकसित की जा रही मॉडल सड़कें शहर की नई पहचान बनेंगी। इसलिए निर्माण कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता तीनों का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी कारण से परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
समीक्षा बैठक में नगरायुक्त संतोष कुमार वैश्य, मुख्य अभियंता (सिविल) नगर निगम अरविंद श्रीवास्तव, संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, कंसल्टेंट फर्मों के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि आगरा के नागरिकों को जल्द बेहतर और आधुनिक सड़क सुविधाएं मिल सकें।
