आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का लंबित मांगों को लेकर धरना लगातार जारी है। कर्मचारी संघ ने प्रशासन पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने प्रोन्नति, एसीपी, वेतन वृद्धि और संविदा कर्मियों के स्थायीकरण सहित कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ द्वारा शुरू किया गया धरना लगातार जारी है। विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी धरने पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याएं लंबित हैं, लेकिन बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं किया जा रहा।
धरने की शुरुआत 5 जून से हुई थी। कर्मचारी संघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर और वार्ता के माध्यम से कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार अनदेखी के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने हमेशा विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने में अपनी जिम्मेदारी निभाई है, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने जिन मांगों को प्रमुखता से उठाया है, उनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की प्रोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना सबसे अहम मुद्दा है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से प्रोन्नति की प्रक्रिया अटकी हुई है, जिसके कारण कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच गए हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया।
इसके अलावा पात्र तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एसीपी का लाभ देने की मांग भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि निर्धारित पात्रता पूरी करने के बावजूद कई कर्मचारियों को अब तक एसीपी का लाभ नहीं दिया गया। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनमें असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
धरने में शामिल कर्मचारियों ने यह भी मांग उठाई कि जिन कर्मचारियों को प्रोन्नति दी गई है, उन्हें एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि शासन स्तर पर इस प्रकार की व्यवस्था लागू है, लेकिन विश्वविद्यालय में इसे लेकर स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो रही।
आंदोलन में संविदा कर्मचारियों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। कर्मचारी संघ ने अवशेष संविदा कर्मचारियों को स्थायी किए जाने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि कई संविदा कर्मी वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी नहीं किया गया। इससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों के हित में अधिक ब्याज दर उपलब्ध कराने वाले बैंक की स्थापना की मांग भी उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान बैंकिंग सुविधाओं से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है, इसलिए बेहतर वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
धरने में प्रशासनिक पदनामों का मुद्दा भी उठा। कर्मचारियों ने शासनादेश के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदनाम दिए जाने की मांग रखी। उनका कहना है कि कई कर्मचारी लंबे समय से जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें पदनाम का लाभ नहीं मिला है।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे इस धरने को लेकर अन्य कर्मचारियों और छात्र संगठनों की भी नजर बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और इनका संबंध कर्मचारियों के भविष्य, वेतन और सेवा सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
धरने के दौरान कई कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को कर्मचारियों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालने के लिए गंभीर पहल करनी चाहिए। उनका कहना है कि आंदोलन किसी भी कर्मचारी की पहली पसंद नहीं होता, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
विश्वविद्यालय परिसर में धरने को लेकर पूरे दिन हलचल बनी रही। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द वार्ता कर समाधान की दिशा में कदम नहीं बढ़ाता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

