आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महामना मालवीय मिशन, आगरा संभाग द्वारा न्यू आगरा स्थित समृद्ध सागर अपार्टमेंट में “पर्यावरण संकल्प एवं बीजारोपण योजना बैठक” का आयोजन किया गया। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण तथा आगामी वर्षा ऋतु में व्यापक स्तर पर पौधरोपण एवं बीजारोपण अभियान चलाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, चिकित्सकों, समाजसेवियों तथा पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. श्याम सुंदर सिंह चौहान ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. पी.एन. अस्थाना रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पर्यावरणविद् डॉ. मुकुल पांड्या ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संयोजन महामना मालवीय मिशन, आगरा संभाग के महासचिव राकेश चंद्र शुक्ला ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ. मुकुल पांड्या ने आगरा क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पौधों के चयन और उनके संरक्षण पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि पौधों को पर्याप्त पानी, सुरक्षा और उचित वातावरण नहीं मिलेगा तो पौधरोपण अभियान अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाएगा। इसलिए पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज को उठानी होगी।
प्रो. पी.एन. अस्थाना ने अपने संबोधन में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के पर्यावरण प्रेम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मालवीय जी ने उस दौर में भी बड़े पैमाने पर पौधे लगवाए थे, जब संसाधनों और सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरणीय हालात को देखते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण अभियान से जुड़ना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. श्याम सुंदर सिंह चौहान ने प्लास्टिक प्रदूषण को पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि एकल उपयोग वाली प्लास्टिक सामग्री पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने सरकार से प्लास्टिक पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने की मांग करते हुए लोगों से भी प्लास्टिक के डिब्बों और अन्य अनावश्यक प्लास्टिक सामग्री के उपयोग से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
कार्यक्रम संयोजक राकेश चंद्र शुक्ला ने उपस्थित लोगों से कम से कम एक पौधा लगाने और अन्य लोगों को भी पौधरोपण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखा जाए और उनके विकास पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने पर्यावरण संतुलन और जैविक जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बैठक में वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अत्यधिक गर्मी और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण इस मौसम में लगाए गए पौधों के जीवित रहने की संभावना कम होती है। ऐसे में वर्षा ऋतु के दौरान योजनाबद्ध और जनभागीदारी आधारित पौधरोपण अभियान अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इसके लिए अभी से तैयारी करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक पौधे लगाए जा सकें और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में आगामी वर्षा ऋतु के दौरान बीजारोपण और पौधरोपण अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने की रूपरेखा भी तैयार की गई। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम में प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी, श्रुति सिन्हा, डॉ. सुभदा पांडे, प्रो. वंदना अग्रवाल, वी.डी. जैन पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य, चन्द्रशेखर शर्मा, डॉ. आनंद, डॉ. आचुत्य सारस्वत, अवनीश शुक्ला, अनिल संयाल, मुकेश जादौन, डॉ. रामजी सक्सेना, अनीता संयाल, पीयूष गुप्ता, एडवोकेट प्रांजल पचौरी, प्रो. अमिता त्रिपाठी, विजय गोयल, सुचेता सिंह, डॉ. मनोज, डॉ. अतुल कुमार उपाध्याय, के.के. पांडे, आरती शर्मा, चतुर्भुज तिवारी, डॉ. दिवाकर तिवारी, पूनम सोलंकी, संजय कुमार, डॉ. वेदांत अग्रवाल, डी.के. पांडे, भव्य प्रताप सिंह और रुद्र प्रताप सिंह सहित अनेक शिक्षाविद्, चिकित्सक, पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बैठक में 50 से अधिक पर्यावरण प्रेमियों, पर्यावरण कवियों, शिक्षकों और समाजसेवियों ने भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण, बीजारोपण, पौधरोपण और पौधों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में राकेश चंद्र शुक्ला ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

