आगरा। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस के अवसर पर दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को दूर करना तथा मरीजों और उनके परिजनों को समय पर पहचान, उपचार और सहयोग के महत्व से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान 200 से 300 मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी के लक्षण, कारण, उपचार और पारिवारिक सहयोग की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

मानसिक स्वास्थ्य आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद समाज में मानसिक रोगों को लेकर कई प्रकार की गलत धारणाएं और सामाजिक संकोच अब भी मौजूद हैं। विशेष रूप से स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी दिखाई देती है। ऐसे में जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक हो जाता है। इसी उद्देश्य के साथ एस.एन. मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में विश्व स्किज़ोफ्रेनिया जागरूकता दिवस के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्किज़ोफ्रेनिया से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करना तथा लोगों को इस बीमारी के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी देना था।

कार्यक्रम के दौरान एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि स्किज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी को लेकर समाज में फैले सामाजिक कलंक और गलत धारणाओं को समाप्त करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों को सामान्य बीमारियों की तरह देखने की आवश्यकता है, क्योंकि समय पर पहचान और सही इलाज के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक जीवन दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज में मानसिक रोगों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की जरूरत है ताकि मरीज स्वयं को अलग-थलग महसूस न करें और बिना किसी डर या संकोच के इलाज के लिए आगे आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन मनोरोग विभाग में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें स्किज़ोफ्रेनिया से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों, मानसिक बदलावों और व्यवहारिक संकेतों की जानकारी दी।
दूसरे दिन मनोरोग ओपीडी में आने वाले लगभग 200 से 300 मरीजों और उनके तीमारदारों को स्किज़ोफ्रेनिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि बीमारी के लक्षणों को समय पर पहचानना कितना जरूरी है और शुरुआती अवस्था में उपचार शुरू होने से मरीज के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान इस वर्ष की थीम “बियॉन्ड द हेडलाइन्स” पर विशेष ध्यान दिया गया। इस थीम के अंतर्गत मानसिक रोगों को केवल एक बीमारी के रूप में नहीं बल्कि मरीज की सामाजिक और भावनात्मक स्थिति के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि मरीजों को समाज से अलग करने या उन्हें हीन भावना का अनुभव कराने के बजाय उनके प्रति सहयोगात्मक और संवेदनशील व्यवहार अपनाना चाहिए।
डॉ. विशाल सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि स्किज़ोफ्रेनिया एक पूरी तरह उपचार योग्य मानसिक बीमारी है और सही चिकित्सकीय परामर्श, नियमित दवाओं तथा परिवार के मजबूत सहयोग से मरीज सामान्य और गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान मरीजों को परिवार और समाज का सहयोग मिलना बेहद जरूरी होता है।
कार्यक्रम के दौरान मनोरोग विभाग की फैकल्टी और रेजिडेंट चिकित्सकों ने सरल एवं संवादात्मक तरीके से स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षण, कारण, उपचार, दवाओं की नियमितता, पुनर्वास प्रक्रिया और परिवार की भूमिका के बारे में जानकारी दी। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपनी जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के सामने रखीं।
कार्यक्रम के समापन पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्किज़ोफ्रेनिया से जुड़े सामाजिक भेदभाव एवं कलंक को समाप्त करने का संकल्प लिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक रोगों को लेकर जागरूकता और सकारात्मक सोच समाज को अधिक संवेदनशील और स्वस्थ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
