गोवर्धन। आगरा मंडल के रेलवे स्टेशनों की आय से जुड़े आंकड़ों में गोवर्धन रेलवे स्टेशन ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कम ट्रेनों के संचालन के बावजूद गोवर्धन रेलवे स्टेशन रेलवे को प्रतिदिन एक लाख रुपये से अधिक की औसत आय दे रहा है। सालाना आधार पर यह राशि लगभग 3.68 करोड़ रुपये तक पहुंच रही है, जिसके आधार पर गोवर्धन स्टेशन आगरा मंडल के सर्वाधिक कमाई करने वाले रेलवे स्टेशनों में दसवें स्थान पर शामिल हुआ है। हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर लंबे समय से इस रेलमार्ग पर अधिक ट्रेनों के संचालन और लंबी दूरी की रेल सेवाओं की मांग भी उठती रही है।
रेलवे नेटवर्क किसी भी क्षेत्र के विकास और लोगों की आवाजाही का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। जिस क्षेत्र में रेल सेवाएं बेहतर होती हैं, वहां व्यापार, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। उत्तर प्रदेश के धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र गोवर्धन से जुड़ा रेलवे स्टेशन भी लगातार अपनी उपयोगिता और महत्व साबित करता दिखाई दे रहा है। सीमित संसाधनों और कम रेलगाड़ियों के संचालन के बावजूद गोवर्धन रेलवे स्टेशन आय के मामले में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
गोवर्धन रेल विकास संघ के अध्यक्ष त्रिभुवन कौशिक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आगरा मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों की आय संबंधी जानकारी मांगी गई थी। रेलवे प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार गोवर्धन रेलवे स्टेशन प्रतिदिन औसतन एक लाख रुपये से अधिक की आय रेलवे को उपलब्ध करा रहा है। इस औसत के आधार पर स्टेशन की सालाना आय लगभग तीन करोड़ अड़सठ लाख रुपये के आसपास पहुंच रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आय के मामले में गोवर्धन रेलवे स्टेशन आगरा मंडल के शीर्ष दस स्टेशनों में शामिल हुआ है और उसे दसवां स्थान प्राप्त हुआ है। आगरा मंडल में सबसे अधिक आय वाले रेलवे स्टेशनों में पहले स्थान पर आगरा कैंट, दूसरे स्थान पर मथुरा जंक्शन और तीसरे स्थान पर आगरा फोर्ट का नाम सामने आया है। ऐसे में गोवर्धन जैसे अपेक्षाकृत छोटे स्टेशन का शीर्ष दस में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेष बात यह भी है कि मथुरा-गोवर्धन-अलवर रेलमार्ग पर वर्तमान समय में गिनी-चुनी पांच से छह रेलगाड़ियां ही संचालित हो रही हैं। सीमित ट्रेनों के संचालन के बावजूद गोवर्धन स्टेशन से इतनी आय होना इस बात की ओर संकेत करता है कि यात्रियों की संख्या और क्षेत्रीय महत्व काफी अधिक है। स्थानीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि यदि इस रेलमार्ग पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए तो आय के आंकड़ों में और तेजी से वृद्धि हो सकती है।
रेलमार्ग से जुड़े अन्य रेलवे स्टेशनों की स्थिति भी उल्लेखनीय बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार डीग, बृजनगर और गोविंदगढ़ जैसे स्टेशन भी रेलवे को सालाना लगभग एक करोड़ रुपये तक की आय उपलब्ध करा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस पूरे रेलखंड में यात्रियों की आवाजाही और उपयोगिता लगातार बनी हुई है।
गोवर्धन रेल विकास संघ के अध्यक्ष त्रिभुवन कौशिक का कहना है कि मथुरा-गोवर्धन-अलवर रेलमार्ग धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन लंबे समय से इस रेलमार्ग को अपेक्षित महत्व नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में यह मार्ग यात्री सुविधाओं की तुलना में मालगाड़ियों के संचालन तक अधिक सीमित दिखाई देता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस रेलमार्ग को देश के विभिन्न प्रमुख शहरों जैसे कोलकाता, अयोध्या, वाराणसी, अहमदाबाद, उदयपुर, अजमेर, मुंबई, उज्जैन, इंदौर, कटरा, अमृतसर, बेंगलुरु और रामेश्वरम जैसे शहरों से जोड़ने की आवश्यकता है। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी बल्कि पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोवर्धन में हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक आयोजनों और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। यदि इस क्षेत्र को लंबी दूरी की ट्रेनों से जोड़ा जाता है तो श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा और रेलवे की आय में भी वृद्धि हो सकती है। लोगों का यह भी कहना है कि समय-समय पर जनप्रतिनिधियों द्वारा आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन अपेक्षित स्तर पर रेल सेवाओं का विस्तार अब तक नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय विकास और यात्रियों की सुविधा के लिए इस दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

