बिना बिल के टैंकर से ले जाया जा रहा था, खाद्य सुरक्षा एवं औषिध प्रशासन की टीम ने की कार्रवाई
आगरा। दूध जिसे सेहत का सबसे बड़ा आधार माना जाता है, वही अगर मिलावट और सड़न की चपेट में आ जाए तो यह “सेहत का सहारा” नहीं बल्कि “बीमारियों का वाहक” बन जाता है। आगरा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने ऐसे ही एक खतरनाक मामले का भंडाफोड़ किया है, जहां करीब 1200 लीटर संदिग्ध, दुर्गंधयुक्त और मानकविहीन दूध पकड़ा गया। यह “सफेद जहर” शादी-विवाह और बड़े आयोजनों में लोगों की थाली तक पहुंचने की तैयारी में था, जो हजारों लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। समय रहते कार्रवाई ने संभावित फूड पॉइजनिंग और संक्रमण के बड़े विस्फोट को रोक दिया।

फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के माध्यम से की गई दूध की जांच
आगरा जनपद में दक्षिणी बाइपास, करहरा गांव नगला सिकरवार (थाना किरावली) के पास खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक टाटा 407 टैंकर को रोका। वाहन चालक प्रेम नारायण (निवासी धौलपुर, राजस्थान) दूध से संबंधित कोई भी बिल या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच के दौरान टैंकर में लगभग 1200 लीटर दूध पाया गया, जो अत्यधिक दुर्गंधयुक्त और संदिग्ध अवस्था में था।
मौके पर फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के माध्यम से दूध की जांच की गई, जिसमें यह मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। अधिकारियों के अनुसार दूध में मिलावट की आशंका स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इसके अलावा वाहन में दूध को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक थर्मोस्टेट या कूलिंग सिस्टम भी नहीं था, जिससे दूध और अधिक खराब हो चुका था।
बड़े आयोजनों में खपाने की थी तैयारी
प्रारंभिक जांच में यह संदेह सामने आया है कि इस दूध को शादी-विवाह, सामूहिक भोज और बड़े आयोजनों में सप्लाई किया जाना था। ऐसे दूध का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता तो सैकड़ों-हजारों लोगों को गंभीर स्वास्थ्य नुकसान हो सकता था। विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी या खराब दूध में बैक्टीरिया, टॉक्सिन और रासायनिक अवशेष हो सकते हैं, जो पेट संबंधी बीमारियां, उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग और बच्चों व बुजुर्गों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा संदिग्ध दूध पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया शरीर में संक्रमण फैलाकर डिहाइड्रेशन, लीवर इंफेक्शन और गंभीर स्थिति में किडनी तक को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी दूध का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
60 हजार रुपये का दूध मौके पर नष्ट किया गया
जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने लगभग 1200 लीटर दूध, जिसकी कीमत करीब 60 हजार रुपये आंकी गई, मौके पर ही नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई संबंधित विक्रेता की सहमति से की गई ताकि यह दूध किसी भी हालत में मानव उपयोग में न आ सके। यह पूरी कार्रवाई सहायक आयुक्त (खाद्य) महेंद्र श्रीवास्तव के निर्देशन में की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश कुमार और कृष्ण चंद्र की टीम ने मौके पर सक्रिय भूमिका निभाई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

