- कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और नैतिकता
- AI Ethics पर विशेषज्ञ व्याख्यान और शोध चर्चा
- विश्वविद्यालय में शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों की सक्रिय सहभागिता
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी में 21-दिवसीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘एआई फॉर ऑल’ का समापन एक ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली व्याख्यान सत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन “कृत्रिम बुद्धिमत्ता नैतिकता” (AI Ethics) विषय पर डॉ. प्रमोद कुमार ने व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें AI के नैतिक, सामाजिक और वैश्विक आयामों पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) में आयोजित 21-दिवसीय AI ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘एआई फॉर ऑल’ का इक्कीसवाँ दिवस अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली रहा। कार्यक्रम के समापन अवसर पर “कृत्रिम बुद्धिमत्ता नैतिकता” विषय पर डॉ. प्रमोद कुमार ने विचारोत्तेजक और विश्लेषणात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
डॉ. कुमार ने बताया कि AI केवल तकनीकी नवाचार नहीं रह गई है, बल्कि अब यह शासन, न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रत्यक्ष प्रभाव डाल रही है। अतः इसके विकास और उपयोग में नैतिकता का समावेश अनिवार्य हो गया है। उन्होंने AI Ethics के महत्व को समझाने के लिए प्रश्न उठाए—यदि AI गलत निर्णय लेती है तो उत्तरदायी कौन होगा? क्या मशीन मानव भाग्य तय कर सकती है? क्या AI नैतिक निर्णय लेने में सक्षम है? इन सवालों के माध्यम से उन्होंने AI Ethics की जटिलता और आवश्यकता को स्पष्ट किया।
डॉ. कुमार ने AI Ethics को मानव मूल्यों पर आधारित सिद्धांतों की वह शाखा बताया जो AI प्रणालियों के डिजाइन, कार्यान्वयन और उपयोग को नियंत्रित करती है। उन्होंने AI Ethics के छह मुख्य सिद्धांतों—पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, निष्पक्षता, गोपनीयता, मानव निगरानी और अहिंसा एवं कल्याण—का विस्तारपूर्वक विवेचन किया। पारदर्शिता में Explainable AI की आवश्यकता, उत्तरदायित्व में परिणामों की जिम्मेदारी, निष्पक्षता में सामाजिक पूर्वाग्रहों को समाप्त करना और गोपनीयता में डेटा सुरक्षा को प्रमुख बताया।
उन्होंने मानव निगरानी को AI के लिए सहायक उपकरण बनाए रखने का महत्व समझाया और अहिंसा एवं कल्याण के अंतर्गत “हानि न करें, कल्याण करें” की अवधारणा पर जोर दिया। डॉ. कुमार ने वैश्विक AI Governance ढाँचों—UNESCO (2021), यूरोपीय संघ AI Act और OECD सिद्धांतों—का उल्लेख किया और भारतीय संदर्भ में नीति आयोग की AI for All पहल, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023 और “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की अवधारणा को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, जैसे गौतम बुद्ध का मध्यम मार्ग और भगवद्गीता के कर्मयोग, को AI Ethics के संदर्भ में जोड़कर नैतिक मार्गदर्शन प्रस्तुत किया। व्याख्यान के अंत में उन्होंने Explainable AI, नैतिक ऑडिट और बहुविषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पी लवानिया ने किया। अंत में कंप्यूटर साइंस विभाग की सह-आचार्य डॉ. प्रतिभा रश्मि ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। IBM से विशेषज्ञ इंजीनियर प्रत्युष मंगल ने जनरेटिव AI पर अपने विचार साझा किए।
इस प्रकार, 21-दिवसीय AI ओरिएंटेशन कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को AI के समकालीन आयामों, नैतिक जिम्मेदारियों और वैश्विक संदर्भ से अवगत कराया। कार्यक्रम ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और समसामयिक महत्व का सिद्ध हुआ, जिसने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों के बीच AI Ethics के प्रति जागरूकता और संवाद को प्रोत्साहित किया।

