28 परीक्षा केंद्रों पर हुई परीक्षा, जूते-मोजे उतरवाए, लाकेट-कुंडल हटवाकर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद मिला प्रवेश
प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर उठा विवाद, डा. मदन मोहन शर्मा ने की जांच की मांग
आगरा(ब्यूरो)। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की ओर से आयोजित पुलिस सब इंस्पेक्टर (एसआइ) भर्ती परीक्षा शनिवार से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई। परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों और नकल को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। जनपद के 28 परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक अभ्यर्थी की सघन जांच की गई। आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का मिलान करने के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया।
आगरा कॉलेज, बैकुंठी देवी कन्या डिग्री कॉलेज, भगवती देवी जैन गर्ल्स इंटर कॉलेज सहित सभी केंद्रों पर सुबह साढ़े सात बजे से ही अभ्यर्थियों का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह आठ बजे से जांच प्रक्रिया प्रारंभ हुई और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद अभ्यर्थियों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनके माध्यम से प्रत्येक कक्ष पर लगातार नजर रखी गई।
परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि अभ्यर्थियों को जूते-मोजे तक उतरवाने पड़े। बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी कुंडल और लाकेट पहनकर पहुंची थीं, जिन्हें भी जांच के दौरान उतरवाया गया। इसके बाद बायोमेट्रिक जांच के जरिए पहचान की पुष्टि कर उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया।
प्रशासनिक स्तर पर भी परीक्षा की निगरानी की गई। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बैकुंठी देवी कन्या डिग्री कॉलेज और भगवती देवी जैन गर्ल्स इंटर कॉलेज का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान ने बताया कि पहली पाली में 7609 और दूसरी पाली में 7717 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस तरह कुल 23520 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 15326 ने परीक्षा में भाग लिया, जबकि 8194 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। रविवार को भी दो पालियों में परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें 23520 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।
इधर, परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। प्रश्न के उत्तर में दिए गए बहुविकल्पीय विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग को लेकर समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है। इस मामले में डा. मदन मोहन शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पंडित शब्द ज्ञान, विद्वता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र में इस शब्द का असंवेदनशील तरीके से प्रयोग समाज की भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने सरकार और संबंधित भर्ती बोर्ड से इस प्रश्न की तत्काल जांच कराने तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो सवर्ण समाज व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होगा।
परीक्षा के कारण शहर में यातायात और परिवहन व्यवस्था पर भी असर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए रेलवे ने विशेष ट्रेनों का संचालन किया और कई ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए गए। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर अभ्यर्थियों के लिए होल्डिंग एरिया भी बनाया गया। जनसंपर्क अधिकारी, रेलवे प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी को सतर्क कर दिया गया है तथा स्टेशनों पर नियमित अंतराल में सफाई कराई जा रही है।
शनिवार को कई ट्रेनों में बड़ी संख्या में यात्री आरक्षित श्रेणी के कोच में भी सवार हो गए। इनमें अधिकतर यात्री टुंडला, झांसी और नई दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में देखे गए।
शहर में संचालित सिटी बस सेवा पर भी परीक्षा का प्रभाव पड़ा। आगरा में इस समय 100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें से अधिकतर बसें एमजी रोड मार्ग से होकर गुजरती हैं। सामान्य दिनों में जहां सिटी बसों में प्रतिदिन लगभग 20 से 21 हजार यात्री सफर करते हैं, वहीं पुलिस एसआइ भर्ती परीक्षा के कारण शनिवार को लगभग 30 हजार यात्रियों ने बसों में सफर किया। इससे परिवहन विभाग को लगभग साढ़े तीन लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

