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Agra News: एसएन मेडिकल कॉलेज में फार्मेकोविजिलेंस पर निरंतर चिकित्सा शिक्षा आयोजित: दवाइयों के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी

Doctors and health professionals attending Pharmacovigilance CME program at SN Medical College, Agra to report drug side effectsHealth professionals participate in a Pharmacovigilance CME organized at SN Medical College, Agra to raise awareness about reporting adverse drug reactions for patient safety.
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आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा के फार्मेकोलॉजी विभाग और नोडल डीआरटीबी सेंटर द्वारा फार्मेकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ़ इंडिया’ (गाजियाबाद) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण निरंतर चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय था “स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा दवाइयों से होने वाले साइड इफेक्ट/रिएक्शन की रिपोर्टिंग की आवश्यकता”।

प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। दवाइयों के अनचाहे प्रभावों की समय पर रिपोर्टिंग न केवल मरीजों की जान बचाती है, बल्कि नियामक संस्थाओं को दवाओं को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण डेटा भी प्रदान करती है। इस तरह के आयोजनों से चिकित्सा कर्मियों में जागरूकता बढ़ती है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलता है।

विशेषज्ञों ने दवाओं के साइड इफेक्ट्स और उनकी वैज्ञानिक रिपोर्टिंग की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। राजकीय मेडिकल कॉलेज, कन्नौज से आई डॉ. शुचि जैन ने व्याख्यान में दवाओं से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों की पहचान, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग के महत्व को स्पष्ट किया। फार्मेकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अलका यादव, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. विपिन कुमार और डॉ. अंकित गुप्ता ने फार्मेकोविजिलेंस के राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में उच्च स्तरीय पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य अधिकारी एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, जिला इम्यूनाइजेशन अधिकारी डॉ. उपेंद्र और आईएमए आगरा के सचिव डॉ. रजनीश मिश्रा शामिल थे। विभागीय विशेषज्ञों में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रोफेसर नीरज कुमार, मेडिसिन में डॉ. प्रोफेसर प्रभात अग्रवाल, स्त्री रोग में डॉ. प्रोफेसर रुचिका गर्ग, चर्मरोग में डॉ. कर्मवीर सिंह, टीबी और छाती रोग में डॉ. सचिन गुप्ता और एफएच मेडिकल कॉलेज से डॉ. प्रोफेसर मीक्षी मौर्या ने अपने अनुभव साझा किए।

विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी दवा से होने वाले दुष्प्रभाव (ADR) की जानकारी रोगी, उनके परिजन या कोई भी स्वास्थ्यकर्मी निम्नलिखित माध्यमों से दे सकते हैं:

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