आगरा। सड़क हादसों में घायल की जान बचाने वाले मददगारों को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने के लिए केंद्र सरकार ने राह-वीर योजना लागू की, लेकिन आगरा में यह योजना जागरूकता के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही है। एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी जिले को एक भी आधिकारिक राहवीर नहीं मिल सका। जबकि सड़क दुर्घटनाओं में लोग घायलों की मदद करते हैं, लेकिन योजना की जानकारी, कानूनी सुरक्षा को लेकर भरोसे की कमी और प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण वे पुरस्कार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हाल ही में दो लोगों के नाम शासन को भेजे गए हैं, जबकि पिछले वर्ष एक दावेदार दस्तावेजी कमियों के कारण लाभ से वंचित रह गया था।
सड़क हादसों में हर मिनट किसी न किसी घायल की जिंदगी समय पर मिलने वाली मदद पर टिकी होती है। दुर्घटना के बाद का पहला “गोल्डन ऑवर” किसी भी घायल के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से राह-वीर योजना शुरू की, ताकि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जा सके और लोगों में बिना किसी डर के मदद करने की भावना बढ़े। योजना के तहत पहले पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, जिसे अप्रैल 2025 से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया। इसके बावजूद आगरा में यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिले में एक भी आधिकारिक राहवीर घोषित नहीं हो सका है।
हैरानी की बात यह है कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान लोग घायलों की मदद जरूर करते हैं, लेकिन अधिकांश लोगों को यह जानकारी ही नहीं है कि सरकार ऐसे मददगारों को सम्मानित भी करती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग आज भी पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के डर से सामने आने से बचते हैं। ऐसे में सरकार की मंशा और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
आरटीओ प्रवर्तन अखिलेश द्विवेदी के अनुसार, राह-वीर योजना के तहत पात्र व्यक्तियों की रिपोर्ट जिला प्रशासन स्तर से तैयार कर शासन को भेजी जाती है। इसके लिए गठित समिति में एआरटीओ, पुलिस, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी शामिल होते हैं। समिति की जांच और संस्तुति के बाद शासन से स्वीकृति मिलने पर 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जगदीशपुरा और सिकंदरा क्षेत्र के दो लोगों के नाम पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। वहीं, पिछले वर्ष एक दावेदार केवल दस्तावेजी कमियों के कारण इस योजना का लाभ नहीं ले सका।
योजना से ज्यादा प्रचार की जरूरत
योजना की सबसे बड़ी कमजोरी इसका सीमित प्रचार-प्रसार बनकर सामने आया है। गांवों, कस्बों और शहर के मोहल्लों तक इस योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए कोई व्यापक अभियान नहीं चलाया गया। सड़क सुरक्षा सप्ताह और जागरूकता कार्यक्रमों में भी राह-वीर योजना का प्रचार सीमित रहा। आम लोगों को यह नहीं बताया गया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को पुलिस या कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। परिणाम यह है कि 25 हजार रुपये का पुरस्कार फिलहाल सरकारी फाइलों और विज्ञप्तियों तक ही सीमित दिखाई देता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि राह-वीर योजना के तहत पात्र लोगों के नाम भेजे जा रहे हैं। उनकी रिपोर्ट तैयार कर समिति की संस्तुति के बाद शासन को भेजी जाती है। शासन से स्वीकृति मिलने पर 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन का मानना है कि सरकार ने योजना लागू कर पुरस्कार राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये जरूर कर दी, लेकिन लोगों के मन से पुलिस का डर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। लोगों को आशंका रहती है कि कहीं मदद करने के बाद उन्हें ही किसी मामले में उलझा न दिया जाए। उनका कहना है कि केवल पुरस्कार राशि बढ़ाने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। पुलिस को व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों के बीच भरोसा पैदा करना होगा और यह विश्वास दिलाना होगा कि मददगार को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
समाजशास्त्र विभाग, आगरा कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविंद गुप्ता भी मानते हैं कि लोगों में पुलिस और प्रशासन के प्रति भरोसे की कमी बनी हुई है। उनके अनुसार, पहले प्रशासन को समाज के बीच विश्वास का माहौल तैयार करना होगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और अधिकारियों को आगे आकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। साथ ही यह भरोसा भी दिलाना होगा कि सड़क हादसे में घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को किसी तरह से परेशान नहीं किया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि वर्तमान समय में सामाजिक जिम्मेदारी का भाव भी पहले की तुलना में कमजोर हुआ है, जिसे दोबारा मजबूत करने की आवश्यकता है।
आंकड़े बताते हैं कि आगरा में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2024 में जिले में 1,223 सड़क दुर्घटनाओं में 586 लोगों की मौत हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 1,456 और मृतकों का आंकड़ा 748 तक पहुंच गया। वर्ष 2023 में सड़क हादसों में 499 लोगों की जान गई थी। यानी दो वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज हुई है और एक वर्ष के भीतर ही 87 अतिरिक्त मौतें सामने आईं। सड़क हादसों में मौत के मामलों में वर्ष 2023 में आगरा प्रदेश में 11वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2024 में यह छठे स्थान पर पहुंच गया।
बीते दो वर्षों में कई बड़े हादसों ने पूरे जिले को झकझोर दिया। 8 दिसंबर 2024 को यमुना एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार निजी बस डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें दो लोगों की मौत हुई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। 20 मई 2025 को आगरा-ग्वालियर हाईवे पर कैंटर और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई और ट्रक चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई। 25 अक्टूबर 2025 को न्यू आगरा क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े लोगों को कुचल दिया, जिसमें पांच लोगों की मौत और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 16 दिसंबर 2025 को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे में स्लीपर बस ट्रक से टकरा गई, जिससे चार लोगों की मौत और करीब दस यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। 31 जनवरी को जलेसर रोड पर तेज रफ्तार डंपर ने दो ऑटो को टक्कर मार दी, जिसमें पांच लोगों की जान चली गई। उसी दिन इनर रिंग रोड पर घने कोहरे और सड़क पर बिना चेतावनी छोड़े गए मिट्टी के ढेर के कारण कई वाहन आपस में टकरा गए। वहीं 20 मार्च को चित्राहाट में मां कैला देवी के दर्शन कर लौट रहे एक परिवार की बोलेरो कार चालक को झपकी आने के कारण पेड़ से टकरा गई, जिसमें एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई।
इन लगातार बढ़ते हादसों के बीच राह-वीर योजना जैसी पहल की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। लेकिन जब तक सरकार, पुलिस और प्रशासन मिलकर इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं करेंगे, लोगों के मन से कानूनी कार्रवाई का डर दूर नहीं करेंगे और उन्हें उनके अधिकारों व सुरक्षा के बारे में जागरूक नहीं करेंगे, तब तक 25 हजार रुपये का पुरस्कार कागजों तक सीमित रहेगा। जरूरत इस बात की है कि सड़क पर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाला हर मददगार खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। तभी राह-वीर योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को हासिल कर सकेगी और सड़क हादसों में अनमोल जिंदगियां बचाने की दिशा में प्रभावी साबित होगी।
