आगरा। आगरा के तेहरा सैया स्थित एक सरकारी गोदाम में तीन कॉमन सैंड बोआ सांप मिलने से कर्मचारियों में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षित रेस्क्यू अभियान चलाया और तीनों सांपों को बिना नुकसान पहुंचाए बचा लिया। विशेषज्ञों के अनुसार यह गैर विषैले सांप मनुष्यों के लिए हानिरहित होते हैं और चूहों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तेहरा सैया स्थित सहकारी समिति के एक सरकारी गोदाम में तीन कॉमन सैंड बोआ सांप मिलने से कर्मचारियों के बीच कुछ समय के लिए हलचल की स्थिति बन गई। हालांकि समय रहते सूचना मिलने पर उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षित बचाव अभियान चलाया और तीनों सांपों को सुरक्षित निकाल लिया। बाद में स्वास्थ्य जांच और निगरानी के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार गोदाम में कार्यरत कर्मचारियों ने भंडारण सुविधा की सीढ़ियों के नीचे सांपों को देखा था। अचानक सांप दिखाई देने से कर्मचारी चिंतित हो गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल वन विभाग को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग ने वाइल्डलाइफ एसओएस की आगरा हेल्पलाइन पर संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई।

मौके पर पहुंची वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट ने सबसे पहले पूरे क्षेत्र का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया। शुरुआती जानकारी में कर्मचारियों ने दो सांप दिखाई देने की बात कही थी, लेकिन जब टीम ने गहन जांच की तो वहां एक तीसरा सांप भी छिपा हुआ मिला। इसके बाद टीम ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों की सहायता से तीनों सांपों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला।
रेस्क्यू अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि सांपों को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे। सफल रेस्क्यू के बाद तीनों सांपों को वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट सुविधा में निगरानी के लिए रखा गया, जहां उनकी स्थिति का निरीक्षण किया गया। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें उनके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार कॉमन सैंड बोआ एक गैर विषैली सांप प्रजाति है, जो सामान्य रूप से मनुष्यों के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं होती। यह प्रजाति अक्सर जमीन के अंदर बिल बनाकर या अंधेरे, बंद और शांत स्थानों में रहना पसंद करती है। गोदाम, भंडारण स्थल और कृषि क्षेत्र इनके लिए सामान्य आश्रय स्थल माने जाते हैं। खासतौर पर गर्मी के मौसम में ये सांप ठंडी सतहों की तलाश में ऐसे स्थानों तक पहुंच जाते हैं ताकि अपने शरीर के तापमान को संतुलित रख सकें।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि कॉमन सैंड बोआ सांप पूरी तरह से गैर विषैले और हानिरहित होते हैं। उन्होंने कहा कि ये सांप चूहों की संख्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे किसानों और गोदामों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। उन्होंने गोदाम कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने घबराकर सांपों को नुकसान पहुंचाने की बजाय संबंधित विभाग को सूचना देकर जिम्मेदारी का परिचय दिया। साथ ही वन विभाग और रेस्क्यू टीम के बीच हुए त्वरित समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि यह सांप संभवतः केवल सुरक्षित आश्रय की तलाश में गोदाम तक पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि इनसे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं होता और गैर विषैले सांपों के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता सकारात्मक संकेत है। उनका मानना है कि जागरूकता बढ़ने से वन्यजीवों और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण परियोजना निदेशक बैजूराज एम.वी. ने बताया कि बढ़ती गर्मी के दौरान गोदाम और भंडारण स्थल कई बार वन्यजीवों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग और बचाव टीम के बीच समय पर सूचना और बेहतर समन्वय ऐसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे वन्यजीवों को सुरक्षित बचाकर उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि किसी भी वन्यजीव को देखकर घबराने या नुकसान पहुंचाने की बजाय विशेषज्ञों और संबंधित विभाग को सूचना देना सबसे बेहतर विकल्प है। इससे मनुष्यों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
