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Food Safety Department officials seizing restricted Khesari dal being sold as Arhar dal during a raid in Agra, Uttar Pradesh.
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आगरा। आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अरहर दाल के नाम पर बेची जा रही प्रतिबंधित खेसारी दाल के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। किरावली क्षेत्र से शुरू हुई जांच नगला घुरैला स्थित गोदाम तक पहुंची, जहां 2760 किलोग्राम दाल से भरे 92 कट्टों को सीज किया गया। विभाग को लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में फेरी के माध्यम से सस्ती दाल को अरहर बताकर बेचने की शिकायतें मिल रही थीं। कार्रवाई के बाद अब पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है कि यह सामग्री कहां-कहां भेजी जा रही थी।

आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की बड़ी कार्रवाई ने ग्रामीण क्षेत्रों तक फैले एक ऐसे कारोबार की परतें खोल दी हैं, जिसमें लोगों की थाली तक पहुंचने वाली दाल के नाम पर कथित तौर पर बड़ा खेल चल रहा था। अरहर जैसी दिखाई देने वाली दाल को कम कीमत पर खरीदकर अधिक कीमत वाली अरहर बताकर बेचे जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने सघन जांच शुरू की, जिसके बाद पूरी कड़ी एक-एक कर खुलती चली गई।

सूचना के आधार पर विभाग ने सबसे पहले किरावली क्षेत्र के ग्राम मलिकपुरा में कार्रवाई की। विभागीय अधिकारियों को लगातार जानकारी मिल रही थी कि क्षेत्र में कुछ लोग फेरी लगाकर ग्रामीण इलाकों में दाल बेच रहे हैं। शुरुआत में यह सामान्य व्यापारिक गतिविधि की तरह दिखाई दे रही थी, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों और इनपुट ने विभाग को संदेह पैदा कर दिया।

जांच के दौरान विभागीय टीम मौके पर पहुंची तो वहां अनीश पुत्र मोती निवासी सिंहपुर, जनपद फिरोजाबाद फेरी के माध्यम से दाल बेचता मिला। निरीक्षण के दौरान विक्रय के लिए रखी गई दाल की गुणवत्ता और उसकी पहचान को लेकर संदेह होने पर अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की। मौके से अरहर दाल के नाम पर बेची जा रही सामग्री का नमूना लिया गया ताकि प्रयोगशाला परीक्षण के माध्यम से उसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जा सके।

कार्रवाई के दौरान लगभग 80 किलोग्राम दाल से भरे चार बोरे भी बरामद किए गए। विभाग ने नियमानुसार इन बोरों को सीज कर विक्रेता की अभिरक्षा में सौंप दिया। मौके पर हुई पूछताछ के दौरान टीम को एक अहम सुराग मिला, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

पूछताछ में पता चला कि संबंधित सामग्री एक गोदाम से लाई जा रही थी, जो नगला घुरैला, कारगरौल क्षेत्र में स्थित है। जानकारी मिलते ही अधिकारियों ने तुरंत आगे की कार्रवाई शुरू की। विभाग को आशंका थी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ी मात्रा में सामग्री दूसरी जगह पहुंचाई जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार विभाग को लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग सस्ती कीमत पर उपलब्ध खेसारी दाल को अरहर बताकर ग्रामीण क्षेत्रों में फेरी के जरिए बेच रहे हैं। चूंकि आम लोगों के लिए दोनों दालों की पहचान करना आसान नहीं होता, इसलिए इस स्थिति का फायदा उठाकर लोगों को भ्रमित किए जाने की आशंका जताई जा रही थी।

मुखबिर से मिली सटीक सूचना के बाद सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय महेंद्र श्रीवास्तव के निर्देशन में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता के नेतृत्व में टीम गठित की गई। योजना बनाकर मंगलवार देर रात नगला घुरैला स्थित पेट्रोल पंप के सामने बने गोदाम पर दबिश दी गई।

देर रात हुई कार्रवाई के दौरान जब टीम गोदाम के भीतर पहुंची तो वहां मौजूद सामग्री को देखकर अधिकारी भी चौंक गए। गोदाम में बड़ी मात्रा में दाल के कट्टे रखे मिले। गहन निरीक्षण और गणना के बाद वहां से लगभग 2760 किलोग्राम खेसारी दाल बरामद की गई, जो कुल 92 कट्टों में भरी हुई थी।

मौके पर मिली पूरी खेप को विभाग ने तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया। इसके बाद सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए बरामद सामग्री को गोदाम संचालक करीम खान निवासी फिरोजाबाद की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बरामद की गई सामग्री को अरहर दाल बताकर ग्रामीण क्षेत्रों में बेचा जा रहा था। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में खेसारी दाल की बिक्री प्रतिबंधित है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक इसका सेवन स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है। लगातार उपयोग से शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।

पूरी कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार चौरसिया, रविंद्र सिंह परमार, अजय वर्मा, राकेश यादव, कृष्ण चन्द्र पटेल और राकेश कुमार शामिल रहे। अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और नियमानुसार अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं।

कार्रवाई के बाद अब विभाग पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है। अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाने का है कि यह सामग्री किन-किन क्षेत्रों तक पहुंच रही थी, इसकी आपूर्ति कहां से हो रही थी और इसमें कितने लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि यह गतिविधि कितने समय से संचालित की जा रही थी।

इस कार्रवाई के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले सामान की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। विभाग का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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