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Agra News: इंस्पेक्टर क्राइम ने जनसेवा केंद्र संचालकों के साथ की बैठक, साइबर अपराध के प्रति किया जागरूक

Inspector Crime Purushottam Pal addressing Jan Seva Kendra operators during cyber crime awareness meeting in Fatehabadथाने में जनसेवा केंद्र संचालकों की बैठक लेते इंस्पेक्टर क्राइम पुरुषोत्तम पाल
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फतेहाबाद। साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए फतेहाबाद थाना पुलिस ने जनसेवा केंद्र संचालकों के साथ अहम बैठक कर उन्हें सतर्क किया। थाना फतेहाबाद में आयोजित बैठक में इंस्पेक्टर क्राइम पुरुषोत्तम पाल ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई जनसेवा केंद्र संचालक साइबर ठगों की मदद करता या फर्जी दस्तावेज तैयार करता पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने संचालकों को संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन, फर्जी दस्तावेज और बिना सत्यापन के कार्य न करने के निर्देश देते हुए साइबर कानूनों और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी।

डिजिटल इंडिया के बढ़ते विस्तार के साथ साइबर अपराधों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई ट्रांजैक्शन और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए अब पुलिस प्रशासन भी लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को थाना फतेहाबाद में क्षेत्र के जनसेवा केंद्र संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें साइबर अपराधों से बचाव और जनसेवा केंद्रों की जिम्मेदारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता इंस्पेक्टर क्राइम पुरुषोत्तम पाल ने की। उन्होंने जनसेवा केंद्र संचालकों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी संचालक साइबर अपराधियों की मदद करता हुआ या किसी प्रकार के फर्जीवाड़े में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस लगातार निगरानी रख रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान इंस्पेक्टर क्राइम ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर ठगी की रकम को इधर-उधर करने और उसे वैध दिखाने के लिए जनसेवा केंद्रों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। कई बार अधिक कमीशन का लालच देकर संचालकों को अपने जाल में फंसाया जाता है। उन्होंने संचालकों से कहा कि किसी भी प्रकार के संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन से दूर रहें और बिना पूरी जानकारी के किसी भी अनजान व्यक्ति के खाते से यूपीआई या अन्य माध्यम से लेनदेन न करें।

उन्होंने कहा कि कई साइबर अपराधी फर्जी पहचान और झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जनसेवा केंद्रों के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं। यदि कोई संचालक लालच में आकर ऐसे लेनदेन करता है तो वह भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कानून साइबर अपराधियों की मदद करने वालों को भी उतना ही जिम्मेदार मानता है जितना अपराध करने वालों को।

इंस्पेक्टर क्राइम ने जनसेवा केंद्र संचालकों को फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र या किसी भी सरकारी दस्तावेज को तैयार न करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेज बनाना एक गंभीर अपराध है, जिससे न केवल सरकारी व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि इसका उपयोग बड़े साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी में भी किया जाता है। ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में संचालकों को कई महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्देश भी दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जनसेवा केंद्रों पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति का बैंकिंग लेनदेन न किया जाए। किसी भी दस्तावेज को तैयार करने से पहले उसकी मूल प्रति का मिलान अवश्य किया जाए। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध प्रतीत हो या किसी प्रकार की असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और ओटीपी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जनसेवा केंद्र संचालकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि वे सीधे तौर पर आम लोगों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े होते हैं। यदि संचालक सतर्क रहेंगे तो कई साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

बैठक में साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक, केवाईसी अपडेट, बैंक अकाउंट बंद होने का डर, नौकरी का झांसा और इनाम जीतने जैसे तरीकों से लोगों को ठगते हैं। इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर कर छिपाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे मामलों में कई बार जनसेवा केंद्रों का उपयोग भी किया जाता है।

इंस्पेक्टर क्राइम ने कहा कि पुलिस लगातार साइबर अपराधों पर नजर बनाए हुए है और साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए तकनीकी स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने संचालकों से कहा कि वे अपने केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रखें और सभी लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में मदद मिल सके।

बैठक के दौरान मौजूद संचालकों को साइबर कानूनों, डिजिटल सुरक्षा मानकों और बैंकिंग प्रक्रियाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें यह भी बताया कि किसी भी संदिग्ध लेनदेन की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को देना जरूरी है। समय पर सूचना मिलने से कई मामलों में ठगी की रकम को रोका जा सकता है।

जनसेवा केंद्र संचालकों ने भी बैठक में साइबर अपराधों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए उन्हें तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि जनसेवा केंद्र संचालक यदि पूरी सतर्कता और नियमों का पालन करेंगे तो साइबर अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

बैठक में क्षेत्र के दर्जनों जनसेवा केंद्र संचालक मौजूद रहे। सभी को साइबर सुरक्षा से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करने और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने के लिए कहा गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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