आगरा। गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच रिवर कनेक्ट कैंपेन के स्वयंसेवकों ने यमुना आरती स्थल पर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की। सभा में अच्छी और समय पर मानसूनी वर्षा की कामना के साथ यमुना और अन्य जल स्रोतों को बचाने की मांग उठाई गई। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

बदलते मौसम, गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोमवार शाम यमुना आरती स्थल पर पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने को लेकर एक विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। रिवर कनेक्ट कैंपेन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अच्छी और समय पर मानसूनी वर्षा की कामना की गई। इसके साथ ही यमुना नदी, उसकी सहायक नदियों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण मांगें उठाई गईं।

देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून की आशंकाओं और लगातार घटते जल संसाधनों को देखते हुए पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों का ध्यान जल संरक्षण की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने प्रकृति, नदियों, जंगलों, पर्वतों और पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था आज भी काफी हद तक अच्छी मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों किसानों की आजीविका सीधे तौर पर बारिश और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं बल्कि मानव जीवन का आधार है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा, “हम प्रकृति, धरती, पहाड़, नदियों और पेड़ों को खुश और मुस्कुराता हुआ देखना चाहते हैं। अच्छा मानसून केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं बल्कि करोड़ों किसानों की आर्थिक जीवनरेखा भी है।”
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यमुना नदी की लगातार बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यमुना नदी केवल एक जलधारा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन वर्तमान समय में नदी प्रदूषण, गाद जमाव और जल की कमी जैसी कई समस्याओं का सामना कर रही है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि लगातार गिरते भूजल स्तर ने चिंता और बढ़ा दी है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से भूजल का दोहन किया जा रहा है, जबकि उसके संरक्षण और पुनर्भरण की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसके कारण भविष्य में पानी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि वर्तमान स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में जल संकट और अधिक गहरा सकता है। जल संकट केवल पीने के पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर खेती, पर्यावरण और लोगों के जीवन पर भी पड़ेगा।
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि केवल सरकार के स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि आम लोगों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा और अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
इस दौरान रिवर कनेक्ट कैंपेन के स्वयंसेवकों ने एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें आगरा जिले में यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों की तत्काल सफाई और डी-सिल्टिंग कराने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि नदियों की सफाई और जल प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाने चाहिए।
इसके अलावा ज्ञापन में तालाबों की सफाई, नहर प्रणाली को पुनर्जीवित करने और वर्षाजल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई। वक्ताओं का कहना था कि यदि वर्षा के पानी को संरक्षित किया जाए तो जल भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सकती है और भविष्य में जल संकट की स्थिति से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। पानी के सीमित संसाधनों को देखते हुए हर स्तर पर जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।
वार्षिक मानसून प्रार्थना सभा में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, चतुर्भुज तिवारी, राहुल राज, दीपक राजपूत, निधि पाठक, जगन प्रसाद तेहरिया, दिनेश शर्मा, शहतोष गौतम, पंडित जुगल किशोर, गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, अभिनव लाला, पद्मिनी अय्यर, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे जल बचाने और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए आगे आएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
