-पालीवाल पार्क स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में स्थापित जनगणना डाटा सेंटर सक्रिय
-लखनऊ से आए अधिकारियों ने दी डिजिटल हाउसहोल्ड डाटा फीडिंग की ट्रेनिंग
-2027 जनगणना के पहले चरण में डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया पर जोर
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय एक बार फिर डिजिटल जागरूकता और प्रशासनिक नवाचार का केंद्र बनकर उभरा है। विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित एस.आर. रंगनाथन केंद्रीय पुस्तकालय में संचालित जनगणना डाटा सेंटर के माध्यम से आम नागरिकों और विश्वविद्यालय परिवार को बड़ी सुविधा प्रदान की जा रही है। इस पहल के तहत अब शहरवासी भी केंद्र पर पहुंचकर जनगणना 2027 के प्रथम चरण में हाउसहोल्ड डाटा को निशुल्क अपलोड कर सकते हैं। यह कदम डिजिटल भारत की अवधारणा को मजबूती देने के साथ नागरिकों को सरकारी प्रक्रियाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत शुक्रवार को कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत हाउसहोल्ड सूचना की डिजिटल डाटा फीडिंग प्रक्रिया का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यम से सटीक और व्यवस्थित डेटा दर्ज करने की प्रक्रिया से अवगत कराना था।
कार्यक्रम में लखनऊ से आए असिस्टेंट सेंसस डायरेक्टर गोविंद सोनी ने प्रतिभागियों को डिजिटल हाउसहोल्ड डाटा फीडिंग की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। उन्होंने बताया कि आज के समय में डिजिटल भागीदारी केवल सुविधा नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि सही और सटीक डेटा भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में आधारभूत भूमिका निभाता है। उनके साथ मौजूद अजय कुमार शर्मा ने जनगणना से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रक्रिया देश के विकास ढांचे को मजबूत करती है।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के ऑनरेरी लाइब्रेरियन प्रो. मो. अरशद के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का यह जनगणना डाटा सेंटर केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यहां विश्वविद्यालय परिवार के साथ-साथ आम नागरिक भी अपनी हाउसहोल्ड जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में सेंटर द्वारा निशुल्क सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लोगों को किसी बाहरी माध्यम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

प्रो. अरशद ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में डिजिटल साक्षरता और प्रशासनिक भागीदारी को बढ़ावा देना भी है। डिजिटल स्व-गणना जैसी पहलें नागरिकों को तकनीक से जोड़कर उन्हें जिम्मेदार और जागरूक बनाती हैं। इससे देश में पारदर्शिता और विकास की गति को भी मजबूती मिलती है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य प्रो. यू.सी. शर्मा और डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. के.के. केसरवानी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।
उल्लेखनीय है कि भारत में जनगणना 2027 की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और इस बार पहली बार डिजिटल स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा दी गई है। इसके अंतर्गत नागरिक घर बैठे आधिकारिक पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस जनगणना में कुल 33 प्रकार के प्रश्न शामिल होंगे, जिनके माध्यम से देश की जनसंख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत आंकलन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय द्वारा संचालित यह डाटा सेंटर न केवल नागरिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बना रहा है, बल्कि उन्हें सरकारी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार भी बना रहा है। यह पहल डिजिटल इंडिया अभियान को नई दिशा देने के साथ समाज में तकनीकी जागरूकता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही है।
