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Agra News: तीन बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो लाइसेंस होगा निरस्त, डीएम ने सड़क सुरक्षा पर दिखाई सख्ती

District Magistrate Manish Bansal chairing district road safety committee meeting in Agra Collectorate regarding traffic rules, ITMS challans and road accident control
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आगरा। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सड़क दुर्घटनाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए परिवहन और पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए। बैठक में आईटीएमएस सिस्टम के जरिए बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने और चालान जमा न करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने, ब्लैक स्पॉट्स पर त्वरित सुधार, सड़क दुर्घटनाओं की विस्तृत मॉनिटरिंग, ट्रॉमा सेंटर समन्वय और स्कूल-कॉलेजों में रोड सेफ्टी क्लब गठन जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जिलाधिकारी ने प्रवर्तन कार्रवाई में कमी और चालान वसूली धीमी होने पर अधिकारियों से जवाब तलब भी किया।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने और सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में परिवहन विभाग, पुलिस विभाग, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा विभाग, रोडवेज तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और विभागीय समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

बैठक में ई-इनफोर्समेंट के अंतर्गत रोड सेफ्टी पॉलिसी के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई। परिवहन और पुलिस विभाग द्वारा हेलमेट, सीट बेल्ट, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन के प्रयोग, गलत दिशा में वाहन चलाने, ड्रंकन ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और स्टंटिंग के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया गया।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि अप्रैल 2026 में परिवहन विभाग ने बिना हेलमेट वाहन चलाने पर 1327, बिना सीट बेल्ट 416, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग में 243, गलत दिशा में वाहन चलाने पर 260, ड्रंकन ड्राइविंग में 29, ओवरस्पीडिंग में 244 तथा स्टंटिंग और खतरनाक ढंग से वाहन चलाने पर 14 प्रवर्तन कार्रवाई कीं।

वहीं पुलिस विभाग द्वारा बिना हेलमेट 67,554, बिना सीट बेल्ट 760, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग में 196, गलत दिशा में वाहन चलाने पर 361, ड्रंकन ड्राइविंग में 17, ओवरस्पीडिंग में 10,424 तथा स्टंटिंग व खतरनाक वाहन संचालन में 20 मामलों में कार्रवाई की गई।

जिलाधिकारी ने पिछले वर्ष की तुलना में परिवहन विभाग द्वारा कम प्रवर्तन कार्रवाई किए जाने पर अधिकारियों से जवाब तलब किया। अधिकारियों ने बताया कि चार पीटीओ की उपलब्धता न होने के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई है।

इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने लक्ष्य के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने और नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। पुलिस विभाग द्वारा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम कार्रवाई किए जाने पर असंतोष जताया गया।

बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन संबंधी कार्रवाई की समीक्षा भी की गई। परिवहन विभाग ने बताया कि ओवरस्पीडिंग में 244, ड्रंकन ड्राइविंग में 58, मोबाइल फोन प्रयोग में 243, मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाने पर 21 तथा ओवरलोडिंग में 177 सहित कुल 743 चालान किए गए हैं। इनमें से 39 मामलों में लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई अग्रसारित की गई है। वहीं पुलिस विभाग ने 10,637 चालान किए, लेकिन लाइसेंस निलंबन के लिए कोई भी प्रकरण अग्रसारित नहीं किया गया। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

परिवहन विभाग ने बताया कि अप्रैल 2026 में कुल 70 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें ओवरस्पीडिंग के 9, ड्रंकन ड्राइविंग के 14, ओवरलोडिंग के 26 तथा अन्य मामलों के 21 लाइसेंस शामिल हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रवर्तन कार्रवाई के अनुपात में लाइसेंस निलंबन बेहद कम है और इसमें तेजी लाई जाए।

बैठक में स्मार्ट सिटी के अंतर्गत संचालित आईटीएमएस सिस्टम की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि शहर, एक्सप्रेस-वे तथा अन्य प्रमुख मार्गों पर लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों से 7,88,325 इमेज प्राप्त हुईं, जिनमें से 2,67,586 चालानों की कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी ने प्राप्त इमेज की तुलना में चालानों की संख्या कम होने और चालान राशि की रिकवरी धीमी होने पर संबंधित अधिकारियों से कारण स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि 1 जनवरी 2025 से अब तक आईटीएमएस सिस्टम के डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जाए। ऐसे वाहन चालकों की सूची तैयार की जाए जिन्होंने तीन या उससे अधिक बार सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है और चालान राशि जमा नहीं की है। ऐसे लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी के इस फैसले को सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशासन की बड़ी सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में जिले के ब्लैक स्पॉट्स की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशानुसार ऐसे स्थान, जहां 500 मीटर की दूरी में पिछले तीन वर्षों के दौरान पांच सड़क दुर्घटनाएं हुई हों या तीन वर्षों में 10 से अधिक मौतें हुई हों, उन्हें ब्लैक स्पॉट माना जाता है। वर्ष 2025 में जिले में पुलिस विभाग द्वारा कुल 44 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 41 पर रोड सेफ्टी ऑडिट का कार्य पूरा हो चुका है।

जिलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कराए गए सड़क सुरक्षा कार्यों की सत्यापन रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही शेष ब्लैक स्पॉट्स पर भी तेजी से सुधारात्मक कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि सड़क इंजीनियरिंग सुधार, साइनेज और सुरक्षा उपायों में देरी नहीं होनी चाहिए।

सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा में बताया गया कि जनपद सड़क दुर्घटनाओं के मामले में प्रदेश में 42वें स्थान पर है। अप्रैल 2025 में जहां 134 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं अप्रैल 2026 में यह संख्या घटकर 116 रह गई। अप्रैल 2025 में 71 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि अप्रैल 2026 में 70 लोगों की मौत हुई। जनवरी से अप्रैल 2026 तक 248 लोगों की मौत हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 274 थी। इसी प्रकार दुर्घटनाओं की संख्या भी 497 से घटकर 418 हो गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार सड़क सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा करते हैं और इन घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी दुर्घटना के बाद यदि उसी स्थान पर दोबारा दुर्घटना होती है तो उसे तत्काल गंभीरता से लिया जाए। संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी न डालें बल्कि समन्वय के साथ काम करें। लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने प्रत्येक सड़क दुर्घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए। रिपोर्ट में दुर्घटना की तिथि, एफआईआर विवरण, संबंधित थानाध्यक्ष का नाम और मोबाइल नंबर, निरीक्षण करने वाले अधिकारी का नाम, संबंधित विभाग, घटना स्थल की फोटो, वाहन चालक का नाम और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर सहित सभी जानकारियां शामिल की जाएंगी।

बैठक में इमरजेंसी मेडिकल प्लान की समीक्षा करते हुए एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम सुधारने, विभिन्न क्षेत्रों में ट्रॉमा सेंटर और अस्पताल चिह्नित करने तथा संबंधित थानों और ट्रॉमा सेंटरों के बीच समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने बीएसए और डीआईओएस को स्कूलों और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने, रोड सेफ्टी क्लब अनिवार्य रूप से गठित करने तथा उनकी गतिविधियों की रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों में सड़क सुरक्षा शपथ, चालक प्रशिक्षण सत्र, ऑनलाइन और ऑफलाइन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए “सड़क सुरक्षा मित्र” बनाए जाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी नगर यमुनाधर चौहान, आरएम रोडवेज बीपी अग्रवाल, एआरटीओ प्रवर्तन आलोक अग्रवाल, एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार सिंह, अपर नगरायुक्त शिशिर कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी राघवेंद्र वर्मा, डीआईओएस चंद्रशेखर, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड सहित सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य मौजूद रहे।

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