• डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड पर कार्यशाला आयोजित की गई।
• छात्रों को कॉर्पोरेट गवर्नेंस, IBC प्रक्रियाओं और विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी दी गई।
• कार्यशाला में व्यावहारिक कौशल, सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप अनुभव के माध्यम से छात्रों के भविष्य की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सेठ पदमचंद जैन प्रबंध संस्थान ने भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान के सहयोग से “इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड: एन एक्सेलेरेटेड करियर ऑप्शन फॉर प्रोफेशनल्स” विषय पर कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यक्रम में छात्रों को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की प्रक्रियाओं, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इस क्षेत्र में करियर विकल्पों की जानकारी दी गई। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक कौशल, सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप अनुभव से भविष्य के लिए तैयार करना था।

कार्यशाला स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी स्थित जे.पी. सभागार में आयोजित हुई। कुलपति ने अपने उद्घाटन उद्बोधन में कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक समझ और कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि IPO, कंपनी पंजीकरण, पूंजी प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के माध्यम से फंडिंग के बारे में जानकारी रखना छात्रों के लिए फायदेमंद है। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय के स्टार्टअप “साइबर योद्धा टेक” का उदाहरण देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और व्यावसायिक दक्षताओं के महत्व को रेखांकित किया।

मुख्य वक्ता ने IBC और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कानून केवल कंपनियों को समाप्त करने के लिए नहीं है, बल्कि उन्हें पुनर्जीवित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी साधन है। छात्रों को “कॉर्पोरेट मित्र योजना” और सरकारी इंटर्नशिप कार्यक्रमों की जानकारी दी गई, जिससे वे व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें और करियर विकल्पों का लाभ उठा सकें।

दूसरे वक्ता ने IBC के तकनीकी पक्षों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने रेज़ोल्यूशन प्रोसेस, इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स की जिम्मेदारियों और क्रेडिटर्स कमेटी की कार्यप्रणाली का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कंपनी पंजीकरण केवल 24 घंटे में संभव है और प्रतिदिन सैकड़ों कंपनियां पंजीकृत हो रही हैं, जो आर्थिक प्रगति का संकेत है।

कार्यशाला में छात्रों को इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल, विधिक सलाहकार, कॉर्पोरेट सलाहकार और वित्तीय विश्लेषक जैसे करियर विकल्पों की जानकारी दी गई। इसके अलावा, छात्रों को व्यावहारिक कौशल और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के महत्व के बारे में बताया गया।
संस्थान के निदेशक ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को बदलते कॉर्पोरेट परिदृश्य में अवसरों की पहचान और सही दिशा में प्रयास करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय लगातार छात्रों को उद्योग और कॉर्पोरेट दुनिया से जोड़ने के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन और संयोजन सुचारू रूप से किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस कार्यशाला ने छात्रों को न केवल कानून और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की गहरी समझ दी, बल्कि उन्हें करियर निर्माण और व्यावहारिक शिक्षा के लिए प्रेरित भी किया। विश्वविद्यालय द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का प्रयास लगातार जारी है।
