- प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने अम्बेडकर के सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान किया
- संकाय, विद्यार्थियों और स्टाफ की उल्लेखनीय भागीदारी, सांस्कृतिक समिति का आयोजन
- विभिन्न विभागाध्यक्षों ने अम्बेडकर के जीवन, संघर्ष और योगदान पर रखे विचार
आगरा: आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में कॉलेज प्रशासन, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही, जहां अम्बेडकर के विचारों और उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई।
सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर एक गरिमामय एवं भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें कॉलेज के संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अम्बेडकर के आदर्श—समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय—आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए इन सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में मंच पर उप-प्राचार्य डॉ. टी. पी. सिंह, एसआईसी डॉ. ब्रजेश शर्मा, डॉ. एस. के. कठेरिया और सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. दिव्या श्रीवास्तव प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आयोजन का समन्वय अस्थि रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. के. एस. दिनकर और मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष गौतम ने सांस्कृतिक समिति के सहयोग से किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न वक्ताओं ने अम्बेडकर के जीवन, उनके संघर्षों और देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. एस. के. कठेरिया ने उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा को रेखांकित किया। नेत्र विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेग्धा सेन ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अम्बेडकर के योगदान पर प्रकाश डाला। शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज यादव ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340 के महत्व को विस्तार से समझाया।
रेडियोथेरेपी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. आर्या ने अम्बेडकर के जीवन पर सारगर्भित वक्तव्य दिया, वहीं डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने महिला सशक्तिकरण में उनकी भूमिका को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। एसआईसी डॉ. ब्रजेश शर्मा ने उनके संघर्षों को प्रेरणादायक बताते हुए उनके विचारों को अपनाने की आवश्यकता बताई।
उप-प्राचार्य डॉ. टी. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कर्म शब्दों से अधिक प्रभावी होते हैं और सभी को अम्बेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. के. एस. दिनकर ने अम्बेडकर की प्रसिद्ध पुस्तक Waiting for a Visa से प्रेरणादायक प्रसंग साझा किए, जिससे उपस्थित लोग गहराई से प्रभावित हुए।
कार्यक्रम का सफल संचालन एमबीबीएस 2023 बैच के विद्यार्थियों द्वारा किया गया। अंत में डॉ. आशीष गौतम ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर विभिन्न विभागाध्यक्षों के साथ डॉ. सांगार, डॉ. कामना, डॉ. उर्वशी, डॉ. सूर्यकमल, डॉ. हरेंद्र, डॉ. रेखा, डॉ. राजीव पुरी सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे। साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं तथा स्टाफ की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
कार्यक्रम का समापन डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों—समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय—को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। इस आयोजन ने न केवल उनके विचारों को पुनः जीवंत किया, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का भी कार्य किया।

