- सावित्रीबाई फुले महिला छात्रावास में 135वीं जयंती पर गरिमामय कार्यक्रम
- 75 छात्राओं की सक्रिय भागीदारी, अतिथियों ने दिए प्रेरक संदेश
- शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा पूरा आयोजन
आगरा: आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में बाबासाहेब की जयंती उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अतिथियों ने उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत सावित्रीबाई फुले भवन (100 क्षमता महिला छात्रावास) में मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशानुसार किया गया, जिसमें छात्रावास की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जहां उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कुल 75 छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी करते हुए पूरे वातावरण को प्रेरणादायक और उत्साहपूर्ण बना दिया।
मुख्य अतिथि बबीता पाठक, महिला समन्वयक, फतेहपुर सीकरी ने अपने संबोधन में बाबासाहेब के राष्ट्र निर्माण में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के माध्यम से उन्होंने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक आधार प्रदान किया, जिससे समाज के वंचित वर्गों को न्याय और अधिकार प्राप्त करने का मार्ग मिला। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे उनके सिद्धांतों को अपनाकर आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनें।
अति विशिष्ट अतिथि योगेश दीवाकर, वरिष्ठ भाजपा नेता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि बाबासाहेब के पदचिह्नों पर चलकर ही जीवन में वास्तविक सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने उनके संघर्षपूर्ण जीवन को उदाहरण बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने समानता और न्याय के लिए निरंतर संघर्ष किया।
विशिष्ट अतिथि अनिल सोनी, निगरानी समिति सदस्य ने महिलाओं के उत्थान में बाबासाहेब की भूमिका को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति, विवाह और तलाक जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हुए, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर छात्रावास की वार्डन डॉ. रत्ना पांडेय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए छात्राओं को समता, स्वतंत्रता और बंधुता के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प दिलाया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. आशु रानी ने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबासाहेब द्वारा प्रतिपादित समरसता का मार्ग ही समाज में एकता और समानता की सच्ची आधारशिला है। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छात्राएं शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में अपनी भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में छात्रावास की अर्चना, तनिषा, सूरिति, सुनीता और सुधा का विशेष योगदान रहा। साथ ही समाजसेवी दुर्गेश दुबे और अशोक कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
अंत में छात्राओं द्वारा केक काटकर और लड्डू वितरण के साथ कार्यक्रम का उल्लासपूर्ण समापन किया गया। यह आयोजन न केवल बाबासाहेब के विचारों को स्मरण करने का अवसर बना, बल्कि छात्राओं के भीतर नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी किया। कार्यक्रम ने शिक्षा, समानता और सशक्तिकरण के मूल्यों को मजबूती देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया।

