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Agra News: एसएन मेडिकल कॉलेज ने रचा इतिहास: 172 साल में पहली बार बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी, मरीज को दूसरे दिन मिली छुट्टी

Doctors team at SN Medical College Agra performing successful beating heart bypass surgery with fast patient recoveryएसएनएमसी आगरा में सफल बीटिंग हार्ट सर्जरी, मरीज को 72 घंटे में छुट्टी
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आगरा: आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज ने अपने 172 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई, जिसे कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने अंजाम दिया। यह जटिल ऑपरेशन बिना दिल को रोके, धड़कती हुई अवस्था में किया गया, जो अत्यंत उच्च स्तरीय सर्जिकल कौशल का उदाहरण माना जाता है।

इस ऐतिहासिक सर्जरी के माध्यम से 66 वर्षीय मरीज रतन लाल शर्मा को नया जीवन मिला। आगरा के बोदला निवासी रतन लाल पिछले छह महीनों से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी, क्योंकि हृदय की दो मुख्य धमनियां पूरी तरह 100 प्रतिशत ब्लॉक हो चुकी थीं और दिल की कार्यक्षमता (ईएफ) घटकर मात्र 35 प्रतिशत रह गई थी। इस उच्च जोखिम वाले मामले में भी सर्जन टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए ऑपरेशन का निर्णय लिया।

13 अप्रैल 2026 की रात करीब तीन घंटे तक चली इस सर्जरी में बीटिंग हार्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसमें दिल को बंद नहीं किया जाता, बल्कि उसकी धड़कन जारी रहते हुए ही बायपास सर्जरी की जाती है। एसएन मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह इस प्रकार की पहली सफल सर्जरी है, जिसने संस्थान को नई पहचान दिलाई है।

इस ऑपरेशन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि मरीज की तेज रिकवरी रही। सर्जरी के बाद मरीज को दूसरे ही दिन, यानी पोस्ट ऑपरेटिव डे-2 के कुछ घंटों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आमतौर पर इस प्रकार की बायपास सर्जरी के बाद मरीज को 5 से 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा जाता है, लेकिन यहां उत्कृष्ट सर्जिकल तकनीक और बेहतर पेरिऑपरेटिव केयर के कारण मरीज को लगभग 72 घंटे के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया। इसे देश का संभवतः पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें इतनी जल्दी रिकवरी के बाद मरीज को छुट्टी मिली हो।

इस पूरे इलाज की एक और खास बात यह रही कि मरीज आर्थिक रूप से कमजोर था और उसके पास आयुष्मान कार्ड भी नहीं था। इसके बावजूद “असाध्य रोग योजना” के तहत उसका पूरा इलाज निःशुल्क किया गया। जिस सर्जरी पर निजी अस्पतालों में आमतौर पर 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आता है, उसे सरकारी योजना के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त कर मरीज को नया जीवन प्रदान किया गया।

इस उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि यह सफलता केवल एक सर्जरी नहीं बल्कि संस्थान की सामूहिक मेहनत और चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब आगरा और आसपास के मरीजों को हृदय रोग के जटिल इलाज के लिए दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि ऐसी सुविधाएं अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।

इस ऐतिहासिक सर्जरी को सफल बनाने में सीटीवीएस टीम के साथ-साथ एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जन टीम में डॉ. सुशील सिंघल के साथ डॉ. शिव, डॉ. सुलभ गर्ग और डॉ. आरती शामिल रहे।

वहीं एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम में डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. योगिता, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. अमिता, डॉ. रोहन, डॉ. अखिल और डॉ. विकास यादव की सक्रिय भूमिका रही। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ में सिस्टर प्रमिला, श्वेता, सुमन, प्रिया तथा सहायक कर्मियों सचिन और मोनू का भी विशेष योगदान रहा।

डॉ. सुशील सिंघल ने इस सफलता का श्रेय पूरी टीम को देते हुए प्राचार्य के सहयोग और चिकित्सा स्टाफ के समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया। यह उपलब्धि न केवल एसएन मेडिकल कॉलेज के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई है, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को भी नई ऊंचाई प्रदान करती है।

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