आगरा। गुर्दा रोग ‘साइलेंट किलर’ है और समय पर जांच, सही जानकारी तथा बेहतर जीवनशैली अपनाकर ही इससे बचाव किया जा सकता है। इसी संदेश के साथ गुरुवार को एस.एन. मेडिकल कॉलेज आगरा के PMSSY ब्लॉक स्थित नेफ्रोलॉजी विभाग में ‘विश्व गुर्दा दिवस 2027’ के अवसर पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. प्रशांत गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 150 मरीजों और उनके तीमारदारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से गुर्दा रोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

प्रिंसिपल प्रो. प्रशांत गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि गुर्दा रोग एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह होता है, जिसके लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल आधुनिक उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना भी है।

उन्होंने बताया कि यदि लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें, संतुलित आहार लें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं तो किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के मरीजों को विश्वस्तरीय डायलिसिस और नेफ्रोलॉजी सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने गुर्दा रोगों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने किडनी रोगों के शुरुआती लक्षणों जैसे पैरों में सूजन, अत्यधिक थकान, पेशाब में बदलाव और भूख कम लगना जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर जांच कराने से बीमारी का जल्द पता चल जाता है और उपचार आसान हो जाता है।
एसोसिएट प्रोफेसर यूरोलॉजी डॉ. अंकुश गुप्ता ने किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांटेशन) की आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गंभीर किडनी रोगियों के लिए यह जीवन बचाने का सबसे प्रभावी विकल्प बन चुका है। उन्होंने अंगदान के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि जागरूकता बढ़ने से कई मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. मुदित खुराना और डॉ. कैरवी भारद्वाज ने डायलिसिस की प्रक्रिया, उससे जुड़े मिथकों और संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने मरीजों को डायलिसिस के दौरान खान-पान में विशेष सावधानी बरतने, नमक और तरल पदार्थों के संतुलित सेवन तथा चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की सलाह दी।
यूरोलॉजी विभाग के डॉ. अभिषेक पाठक और डॉ. विजय त्यागी ने गुर्दे की पथरी, मूत्र मार्ग की रुकावट और अन्य सर्जिकल समस्याओं के उपचार के आधुनिक तरीकों पर प्रकाश डाला और बताया कि समय रहते इलाज कराने से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डायलिसिस टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। इस नाटक के माध्यम से आम लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, नियमित जांच कराने और बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाओं) के सेवन से बचने का संदेश दिया गया। नाटक ने उपस्थित मरीजों और उनके परिजनों को सरल और प्रभावी तरीके से स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. अनुराग, डॉ. अस्तित्व, डॉ. मनीष और डॉ. आदित्य का विशेष योगदान रहा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान मरीजों को क्लिनिकल परामर्श दिया, उनकी शंकाओं का समाधान किया और उन्हें किडनी रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया।
कार्यक्रम के अंत में नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, डायलिसिस टेक्नीशियनों, मरीजों और उनके तीमारदारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, सही जानकारी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही किडनी को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी है।

