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Agra News :आगरा मेट्रो: आरबीएस रैंप से मन:कामेश्वर मेट्रो स्टेशन तक ट्रैक वेल्डिंग का काम पूरा 50 % ट्रैक बनकर तैयार

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 आगरा। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा तक प्रथम कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन में सफल मेट्रो संचालन के बाद यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) पहली कॉरिडोर के शेष भूमिगत खंड को तय समय पर पूरा करने के लिए तेजी से निर्माण कार्य कर रहा है। आरबीएस रैंप से मन:कामेश्वर मेट्रो स्टेशन तक ट्रैक वेल्डिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस खंड में कुल 12 किलोमीटर (अप एवं डाउन लाइन) ट्रैक बिछाया जाना है, जिसमें से लगभग 6 किलोमीटर ट्रैक तैयार हो चुका है। यानी इस हिस्से का 50 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।

Track welding work at RBS Ramp in Agra Metro

यूपीएमआरसी के अनुसार ट्रैक निर्माण के साथ-साथ थर्ड रेल, सिग्नलिंग तथा संबंधित इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल कार्य भी एक साथ किए जा रहे हैं। दूसरी ओर आईएसबीटी से सिकंदरा तक एलिवेटेड सेक्शन पर सिविल वर्क भी तेज़ी से प्रगति पर है।

Completed track at Mankameshwar Metro Station

इसी प्रकार आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बन रहे दूसरे कॉरिडोर का कार्य भी गति पकड़ चुका है। दोनों कॉरिडोरों पर कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि आगरा को समयबद्ध तरीके से विश्वस्तरीय मेट्रो सिस्टम उपलब्ध कराया जा सके।

कैसे तैयार होता है भूमिगत ट्रैक

भूमिगत खंड में सबसे पहले स्टेशनों का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद लॉन्चिंग शाफ्ट बनाकर टनल बोरिंग मशीन (TBM) को लॉन्च किया जाता है, जो गोलाकार टनल तैयार करती है। चूंकि टनल गोल आकार की होती है, इसलिए यहां बैलास्टलेस ट्रैक स्लैब बिछाया जाता है। प्लिंथ बीम पर रखे गए इन स्लैब्स पर बाद में लंबे वेल्डेड रेल (Long Welded Rail) स्थापित किए जाते हैं।

Long welded rail installation in underground metro track


बैलास्टलेस ट्रैक पारंपरिक ट्रैक की तुलना में अधिक मजबूत होता है और इसका रखरखाव भी न्यूनतम रहता है।

हेड हार्डेंड रेल देती है पटरी को बेहतर मजबूती

मेट्रो सिस्टम में ट्रेनों की आवाजाही का अंतराल कम होता है, ऐसे में सामान्य रेल जल्दी घिस सकती है। इसके विपरीत हेड हार्डेंड रेल अधिक मजबूत होती है और लगातार स्पीड व ब्रेकिंग के दौरान भी घर्षण से नुकसान नहीं होता, जिससे क्रैक या टूटने की समस्या नहीं आती।

Metro track with head hardened rail installed

ऑटोमैटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन से बनती हैं लंबी पटरी

भूमिगत ट्रैक निर्माण के दौरान ऑटोमैटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन को क्रेन की मदद से शाफ्ट के अंदर पहुंचाया जाता है। वहीं पटरी के छोटे-छोटे हिस्सों को मशीन की सहायता से जोड़कर लंबी वेल्डेड रेल तैयार की जाती है। इसके बाद इन्हें टनल में बने समतल स्लैब पर बिछाया जाता है।

एलिवेटेड या बैलास्टेड ट्रैक में समतल भूमि पर गिट्टी, स्लीपर और रेल स्थापित की जाती है।

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