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Agra News : हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर जोर, आगरा विश्वविद्यालय में व्याख्यान

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आगरा। मंगलवार को कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के हिंदी विभाग द्वारा विद्यापीठ के सूरकक्ष में प्रातः 12:30 बजे अंतरराष्ट्रीय प्रसार व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘विश्व भाषा के रूप में हिंदी : दशा और दिशा’ विषय पर प्रसार व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम कुलपति के दिशा-निर्देशन में संचालित हुआ।

International broadcast lecture on 'Hindi as a Global Language' at Dr. Bhimrao Ambedkar University, Agra

अंतरराष्ट्रीय प्रसार व्याख्यान का उद्घाटन विद्यापीठ के निदेशक प्रदीप श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय आधारित बीज वक्तव्य के साथ किया।

यू.के. लंदन से पधारी वातायन यू.के. की संस्थापक वरिष्ठ लेखिका, इम्प्रेसरियो और अनुवादक दिव्या माथुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि लंदन में उन्हें हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए अधिक जाना जाता है। उन्होंने बताया कि भाषा और संस्कृति ही मुख्य सूत्र हैं जो देशवासियों और भारत से जोड़े रखते हैं। विदेशों में हिंदी भाषा की दक्षता की मांग बढ़ी है और भारतीयों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। 

Divya Mathur from UK addressing the audience on Hindi promotion abroad

उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण साहित्यिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है। यदि सभी मिलकर हिंदी का मान-सम्मान बढ़ाएंगे, तो इसे संयुक्त राष्ट्र संघ में भी स्थान मिल सकता है।

Rekha Rajvanshi from Australia discussing Hindi education abroad

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से पधारी स्पेशल एजुकेशन और हिंदी शिक्षिका तथा लेखिका रेखा राजवंशी ने ऑस्ट्रेलिया में हिंदी की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया में लगभग 10 लाख भारतीय हैं, जिनमें से दो लाख हिंदी भाषी हैं और 50 हिंदी साहित्यकार सक्रिय हैं। 2012 में ऑस्ट्रेलिया में चलाए गए अभियान के बाद हिंदी को प्राथमिक स्तर पर अनिवार्य किया गया।

 उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में हिंदी पढ़ाना कठिन है, क्योंकि इसे अंग्रेजी माध्यम से व्याकरणिक बारीकियों के साथ पढ़ाना होता है। एक समय था जब ऑस्ट्रेलिया के छह विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही थी, अब सिर्फ दो विश्वविद्यालयों में ही पढ़ाई जा रही है। विदेशों में हिंदी का महत्व तब बढ़ेगा, जब इसे जीविका से जोड़ा जा सकेगा।

कार्यक्रम में दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। पहले समझौते पर वातायन यू.के., लंदन और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के बीच कुलपति, निदेशक प्रदीप श्रीधर और दिव्या माथुर ने हस्ताक्षर किए। दूसरे समझौते पर इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसाइटी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (इलासा) और विश्वविद्यालय के बीच कुलपति, निदेशक प्रदीप श्रीधर और रेखा राजवंशी ने हस्ताक्षर किए।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और अतिथियों के अलावा प्राध्यापकगण पल्लवी आर्य, अमित कुमार सिंह, प्रदीप वर्मा, आदित्य प्रकाश, संदीप शर्मा, रमा ‘रश्मि’, शालिनी श्रीवास्तव, अंगद, विशाल शर्मा, कृष्णकांत, संदीप सिंह, राजेंद्र दवे, उपेंद्र पचौरी, प्रीती यादव और कंचन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

धन्यवाद ज्ञापन वर्षारानी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मोहिनी दयाल ने किया।

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