आगरा। आगरा में आयोजित ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम की मंडलीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग ने स्टॉप डायरिया कैंपेन-2026 को प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया से होने वाली मौतों को रोकने के लिए ओआरएस और जिंक की पर्याप्त उपलब्धता, सही रिपोर्टिंग, स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और व्यापक जनजागरूकता अभियान पर विशेष जोर दिया गया।
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को डायरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने और उपचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को अपर निदेशक कार्यालय के सभागार में ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम की मंडलीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. मंजू सचान ने की। बैठक में आगरा मंडल के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी जनपदों के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान वर्तमान में संचालित स्टॉप डायरिया कैंपेन (दस्त रोको अभियान) के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मंजू सचान ने कहा कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में डायरिया भी शामिल है, जबकि यह ऐसी बीमारी है जिसकी रोकथाम और समय पर उपचार पूरी तरह संभव है। उन्होंने कहा कि यदि अभिभावक और स्वास्थ्य कर्मी शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहें तो अधिकांश मामलों में गंभीर स्थिति बनने से पहले ही बच्चे को सुरक्षित रखा जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी बच्चे को दिनभर में तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त हों तो इसे डायरिया का संकेत मानते हुए तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए, ताकि शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी न होने पाए। साथ ही बच्चे को बिना विलंब निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल उपचार ही नहीं बल्कि जागरूकता भी इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी उद्देश्य से स्टॉप डायरिया कैंपेन के माध्यम से समुदाय स्तर तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने पीएसआई इंडिया द्वारा अभियान में दिए जा रहे सहयोग की सराहना करते हुए मंडल के सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि संस्था के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान की प्रत्येक गतिविधि निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कराई जाए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि प्रत्येक स्वास्थ्य इकाई पर ओआरएस और जिंक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद बच्चे को उपचार सामग्री के अभाव का सामना न करना पड़े।
बैठक के दौरान संयुक्त निदेशक डॉ. नीरज त्यागी ने हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए आंकड़ों की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित एचएमआईएस ऑपरेटरों को निर्देश दिए कि इस माह की रिपोर्ट पूरी सावधानी और शुद्धता के साथ तैयार की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति के आधार पर स्वास्थ्य योजनाओं का बेहतर संचालन किया जा सके।
डिवीजनल कार्यक्रम प्रबंधक पवन कुमार ने सभी जिला कार्यक्रम प्रबंधकों से कहा कि डायरिया से संबंधित प्रत्येक मामले की रिपोर्टिंग समयबद्ध और सटीक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े ही भविष्य की रणनीति तय करने का आधार बनते हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
डिवीजनल अर्बन हेल्थ सलाहकार इरसाद तथा डिवीजनल मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (एमएनई) अधिकारी अफजल ने शहरी स्वास्थ्य इकाइयों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी अर्बन हेल्थ फैसिलिटी पर डायरिया की समय पर पहचान, उपचार और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में भी जागरूकता और निगरानी को मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि अभियान का लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुंच सके।
पीएसआई इंडिया के सीनियर मैनेजर (प्रोग्राम) अनिल द्विवेदी ने ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के अंतर्गत आगरा, मथुरा और फिरोजाबाद जनपदों में आशा कार्यकर्ताओं, आशा संगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य समुदाय स्तर पर डायरिया की समय पर पहचान, ओआरएस एवं जिंक के सही उपयोग तथा अभिभावकों को उचित परामर्श उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि स्टॉप डायरिया कैंपेन के दौरान ई-रिक्शा के माध्यम से जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके जरिए गांवों और शहरी क्षेत्रों में लोगों को डायरिया से बचाव, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, हाथ धोने की आदत तथा समय पर उपचार के संबंध में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही प्रचार-प्रसार सामग्री भी वितरित की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक अभियान का संदेश पहुंच सके।
अनिल द्विवेदी ने बैठक में सरकारी और निजी अस्पतालों में स्थापित ओआरएस कॉर्नर की प्रगति का भी विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इन कॉर्नरों के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों को ओआरएस के महत्व तथा उसके सही उपयोग के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी अधिकारियों से इन केंद्रों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकता के अनुसार संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सुझाव भी साझा किए। इस बात पर सहमति बनी कि डायरिया की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समुदाय, परिवार, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता और अन्य विभागों की सहभागिता भी आवश्यक है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए कि अभियान के दौरान निर्धारित गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी स्तर पर आने वाली समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में फिरोजाबाद के जिला कार्यक्रम प्रबंधक भानु प्रताप, आगरा के अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि गोपाल, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. उपेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुलदीप भारद्वाज, नगरीय स्वास्थ्य समन्वयक आकाश गौतम, मथुरा के जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. रोहिताश सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक संजय सिहोरिया, जिला लेखा प्रबंधक, मैनपुरी के जिला कार्यक्रम प्रबंधक, अर्बन हेल्थ समन्वयक, एचएमआईएस ऑपरेटर तथा पीएसआई इंडिया की ओर से राजेश कुमार प्रजापति, अजय कुमार और पंकज कुमार सहित विभिन्न जनपदों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के समापन पर सभी अधिकारियों ने अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने, प्रत्येक पात्र बच्चे तक ओआरएस और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने, समयबद्ध रिपोर्टिंग बनाए रखने तथा जनजागरूकता गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित करने का संकल्प लिया, ताकि डायरिया से होने वाली बाल मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।
