आगरा। करीब साढ़े तीन साल पहले आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित बहन हत्याकांड में मंगलवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी ललित उर्फ निक्कू चौधरी को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) मृदुल दुबे की अदालत ने मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट (दुर्लभतम) श्रेणी का अपराध मानते हुए कहा कि आरोपी ने केवल संपत्ति के लालच में अपनी ही सगी बहन की हत्या कर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है। अदालत ने टिप्पणी की कि अभियुक्त का कृत्य इतना जघन्य है कि वह मानवता की सीमाओं से बाहर चला गया है और उसे कठोरतम दंड दिया जाना न्यायोचित है।ं
यह सनसनीखेज वारदात 26 नवंबर 2022 को शाहगंज थाना क्षेत्र के जोगी पाड़ा में हुई थी। परिवार के मुखिया यतेंद्र चौधरी तथा बड़े बेटे रूपेश चौधरी का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में छोटे बेटे ललित उर्फ निक्कू चौधरी, विवाहित बेटी दीपा, सबसे छोटी अविवाहित बेटी पूनम चौधरी तथा बड़े भाई रूपेश की पत्नी नीलू चौधरी थीं। पिता और बड़े भाई की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार में विवाद शुरू हो गया था। पूनम और उनकी भाभी नीलू लगातार पैतृक संपत्ति में अपना वैधानिक हिस्सा मांग रही थीं, जबकि ललित इसका विरोध कर रहा था। इसी विवाद ने धीरे-धीरे हिंसक रूप ले लिया।
घटना वाले दिन सुबह संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हुआ। बताया गया कि नीलू चौधरी ने ललित की दुकान पर ताला लगा दिया था। वहीं पूनम चौधरी पूरे घटनाक्रम का अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रही थीं। इसी दौरान ललित उर्फ निक्कू वहां पहुंचा और दुकान पर ताला लगाने का विरोध करने लगा। पूनम ने स्पष्ट कहा कि संपत्ति में उनका भी अधिकार है और दुकान से होने वाली आय में भी उन्हें हिस्सा मिलना चाहिए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी शुरू हो गई।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि ललित ने अपना आपा खो दिया। उसने तमंचा निकालकर पूनम और नीलू पर ताबड़तोड़ सात राउंड फायरिंग कर दी। फायरिंग में पूनम चौधरी के सिर और सीने में छह गोलियां लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं एक गोली नीलू चौधरी के बाजू में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। दिनदहाड़े हुई इस गोलीबारी से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बाजार में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही शाहगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। घायल नीलू चौधरी को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पूनम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। नीलू चौधरी की तहरीर पर पुलिस ने ललित उर्फ निक्कू चौधरी के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद आरोपी की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गईं।
लगातार दबिश और तलाश के बाद पुलिस ने 28 नवंबर 2022 को मुठभेड़ के दौरान आरोपी ललित उर्फ निक्कू चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई नियमित रूप से अदालत में चलती रही।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा है।
फैसला सुनाते हुए एडीजे-5 मृदुल दुबे ने कहा कि यह केवल हत्या का मामला नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर गंभीर आघात है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने महज संपत्ति के लालच में अपनी सगी बहन की हत्या कर भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है। ऐसे अपराध समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करते हैं। इसलिए यह मामला ‘रेयर ऑफ रेयरेस्ट’ की श्रेणी में आता है और इसमें मृत्युदंड से कम कोई सजा न्याय के अनुरूप नहीं होगी।
अदालत द्वारा सुनाए गए इस फैसले के बाद न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। वहीं मृतका के परिजनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा, जहां संपत्ति के लालच में अपने ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ जघन्य अपराध किए जाते हैं। हालांकि कानून के अनुसार मृत्युदंड के इस फैसले की पुष्टि उच्च न्यायालय से होना आवश्यक होगी और दोषी को उच्च न्यायालय में अपील करने का वैधानिक अधिकार भी प्राप्त रहेगा।
