आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह को ऐतिहासिक और यादगार बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इस आयोजन को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे जनसहभागिता, शिक्षा, संस्कृति और विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत के बड़े उत्सव के रूप में आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। गुरुवार को खंदारी परिसर स्थित सेठ पदमचंद जैन संस्थान में आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न समितियों की तैयारियों का आकलन किया गया और कार्यक्रमों को भव्य स्वरूप देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कुलपति प्रो. आशु रानी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शताब्दी वर्ष समारोह की रूपरेखा, कार्यक्रमों की तैयारी, अतिथियों के आमंत्रण, प्रदर्शनी, स्मारिका और सांस्कृतिक गतिविधियों को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि विश्वविद्यालय का मुख्य स्थापना दिवस उद्घाटन समारोह 1 जुलाई को स्वामी विवेकानंद परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में आयोजित होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे सौ वर्षों की उपलब्धियों, विकास यात्रा और भविष्य की नई संभावनाओं के विराट उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है।
बैठक में जानकारी दी गई कि शताब्दी समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए आवश्यक पत्राचार और औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। कुलपति ने सभी समितियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कार्यों की विस्तृत योजना तय समय के भीतर प्रस्तुत करें और सभी तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।

गृह विज्ञान संस्थान की छात्राओं द्वारा हुनर गैलरी तैयार की जाएगी, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभाओं और नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ सामुदायिक रेडियो, केंद्रीय पुस्तकालय, इतिहास विभाग, अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ, नवाचार एवं इन्क्यूबेशन सेल, पर्यटन अध्ययन विभाग तथा ललित कला एवं संगीत विभाग से जुड़ी विशेष प्रदर्शनी और लाइव प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन गतिविधियों के जरिए नई पीढ़ी को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जा सकेगा।
बैठक में प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में एलुमनाई वॉल तैयार की जाएगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन करने वाले पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को स्थान मिलेगा। वहीं छात्र कल्याण गतिविधियों के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीते गए पदक, ट्रॉफियां और सम्मान भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
शताब्दी समारोह के अवसर पर विशेष स्मारिका प्रकाशित करने की तैयारी भी चल रही है। स्मारिका समिति को निर्देश दिए गए कि इसमें विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियां, संस्थागत विकास, ऐतिहासिक दस्तावेज और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों व गणमान्य व्यक्तियों के संदेश शामिल किए जाएं। विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि यह स्मारिका केवल एक प्रकाशन न होकर विश्वविद्यालय की सौ वर्षीय विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज बने।
बैठक में यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष को विशेष पहचान देने के लिए स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी कराने की प्रक्रिया भी उच्च स्तर पर आगे बढ़ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे शताब्दी वर्ष की बड़ी उपलब्धि मान रहा है। कुलपति ने कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के गौरव और उसकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देगा।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने सभी समितियों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, अनुशासन, आतिथ्य, भोजन व्यवस्था, मीडिया समन्वय और कार्यक्रमों के सजीव प्रसारण की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि इतने बड़े आयोजन में हर छोटी व्यवस्था का विशेष महत्व होता है और सभी समितियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
बैठक में सुदर्शन, अजय मिश्रा, प्रो. बी.एस. शर्मा, अतुल सक्सेना, पूजा सक्सेना सहित विभिन्न समितियों के संयोजक और सह-संयोजक मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने विभागों की तैयारियों की जानकारी साझा की।
बैठक के अंत में कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भविष्य की नई संभावनाओं, नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में प्रेरणादायी संकल्प का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि यह पूरे विश्वविद्यालय परिवार और आगरा शहर के लिए गर्व का क्षण है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस समारोह को जन-जन से जोड़ते हुए आगरा की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान के बड़े उत्सव के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

