आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा ने सत्र 2026-27 के लिए सम्बद्धता विस्तारण से संबंधित संशोधित आदेश जारी कर दिया है। यह निर्णय 10 जून को विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. आशुरानी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यपरिषद की ऑनलाइन बैठक में लिया गया। बैठक में कार्यपरिषद के सदस्य ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए और महाविद्यालयों से जुड़ी शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक, परास्नातक एवं विधि महाविद्यालयों के लिए सम्बद्धता विस्तारण की संशोधित प्रक्रिया और शुल्क संरचना को औपचारिक रूप से जारी कर दिया है। यह आदेश उन सभी महाविद्यालयों पर लागू होगा, जिन्हें शैक्षिक सत्र 2025-26 में अस्थायी सम्बद्धता प्रदान की गई थी।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी संबंधित महाविद्यालयों को निर्धारित सम्बद्धता शुल्क जमा कर आवश्यक अभिलेखों सहित आवेदन पत्र विश्वविद्यालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्नातक स्तर पर प्रति पाठ्यक्रम 29,500 रुपये (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) सम्बद्धता शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके साथ 20,000 रुपये अर्थदण्ड जोड़ने पर कुल 49,500 रुपये प्रति पाठ्यक्रम जमा करने होंगे।
इसी प्रकार परास्नातक स्तर पर प्रति विषय 29,500 रुपये सम्बद्धता शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें 5,000 रुपये अर्थदण्ड जोड़कर कुल 34,500 रुपये जमा करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित शुल्क का भुगतान विश्वविद्यालय के अधिकृत बैंक खाते में किया जाएगा और उसकी सत्यापित रसीद आवेदन पत्रावली के साथ संलग्न करनी होगी।
आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी महाविद्यालय शिक्षक-प्रबंध समिति का अनुमोदन पत्र, अवस्थापना सुविधाओं की पूर्णता संबंधी शपथ पत्र तथा सम्बद्धता से संबंधित सभी आवश्यक प्रपत्रों को पूर्ण रूप से तैयार कर 20 जून 2026 तक विश्वविद्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करें। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त होने वाली पत्रावलियों पर विलंब शुल्क लागू होगा।
विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार 20 जून के बाद और 30 जून तक आवेदन करने वाले महाविद्यालयों को अतिरिक्त विलंब शुल्क का भुगतान करना होगा। इस अवधि में स्नातक स्तर पर प्रति पाठ्यक्रम 25,000 रुपये तथा परास्नातक स्तर पर प्रति विषय 10,000 रुपये अतिरिक्त अर्थदण्ड के साथ आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 30 जून 2026 के पश्चात किसी भी महाविद्यालय का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद की स्थिति में संबंधित महाविद्यालय स्वयं जिम्मेदार होगा और किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
यह संशोधित आदेश विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में जारी कार्यालय आदेश दिनांक 18 मई का स्थान लेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों से अपील की है कि वे समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूर्ण करें ताकि सत्र 2026-27 के लिए सम्बद्धता विस्तार प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और नियामक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इससे न केवल महाविद्यालयों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन भी सुनिश्चित होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया है कि वे आदेश का गंभीरता से पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूर्ण न करने पर महाविद्यालयों की सम्बद्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
