सार
देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को बड़ी इंजीनियरिंग सफलता मिली है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में तीसरी पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। महज पांच महीनों में तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा होने से हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्नत तकनीक, आधुनिक निगरानी प्रणालियों और कड़े सुरक्षा मानकों के साथ तैयार की गई यह सुरंग परियोजना की प्रगति में महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

मुंबई। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका स्थित अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह उपलब्धि देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में तेजी का संकेत मानी जा रही है। पिछले पांच महीनों के भीतर महाराष्ट्र में तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा होने से परियोजना के सबसे जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हिस्सों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
नई निर्मित एमटी-07 सुरंग दोनों दिशाओं की बुलेट ट्रेन पटरियों के लिए तैयार की गई है। यह सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट तकनीक के माध्यम से की गई। निर्माण के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया, जिससे कार्य समयबद्ध और सुरक्षित तरीके से पूरा हो सका।

सुरंग निर्माण के दौरान संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और सटीक निर्माण सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया गया। पूरी प्रक्रिया में भू-तकनीकी उपकरणों की सहायता से सुरंग की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), त्रि-आयामी लक्ष्य प्रणाली, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कंपन, सुरंग की गतिविधियों तथा आसपास की संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की वास्तविक समय में निगरानी की गई।

निर्माण एजेंसियों ने श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित प्रवेश प्रणाली तथा निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण की व्यवस्था की गई। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी गई और प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी की गई।
यह उपलब्धि महाराष्ट्र में पहले से पूरी हो चुकी सुरंग परियोजनाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। परियोजना की पहली पर्वतीय सुरंग एमटी-05, जिसकी लंबाई 1.5 किलोमीटर है, का निर्माण 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले क्षेत्र के निकट पूरा किया गया था। यह महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग थी। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग एमटी-06 का निर्माण पूरा हुआ। 454 मीटर लंबी इस सुरंग को न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) के माध्यम से तैयार किया गया था। अब एमटी-07 के पूरा होने के साथ पालघर जिले में तीन प्रमुख सुरंगों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना के अंतर्गत कुल सात पर्वतीय सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 की खुदाई पूरी हो चुकी है। एमटी-08, जिसकी लंबाई 350 मीटर है, में खुदाई का कार्य 5 अक्टूबर 2023 को पूरा कर लिया गया था। वहीं एमटी-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है और एमटी-04 में लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। एमटी-01 और एमटी-02 में निर्माण कार्य लगातार जारी है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अंतर्गत कुल आठ पर्वतीय सुरंगें बनाई जा रही हैं। इनमें से सात सुरंगें महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित हैं, जबकि एक सुरंग गुजरात के वलसाड जिले में बनाई जा रही है। गुजरात स्थित सुरंग का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित सभी तीन पर्वतीय सुरंगों की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का यह हिस्सा महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में परियोजना से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बोइसर और वापी के बीच के खंड में एमटी-08, एमटी-07 और एमटी-06 जैसी तीन महत्वपूर्ण पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं, जिनका निर्माण परियोजना की प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना देश में आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास का प्रमुख उदाहरण बन रही है। उन्नत सुरंग निर्माण तकनीक, अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों को अपनाकर यह परियोजना भारत की हाई-स्पीड रेल क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान कर रही है। सुरक्षित, तेज और भविष्य उन्मुख रेल परिवहन व्यवस्था की दिशा में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे देश की परिवहन संरचना को नई गति मिलने की उम्मीद है।

