आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के के.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ हिंदी एंड लिंग्विस्टिक्स स्थित विदेशी भाषा विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को “इंडो-रूस अकादमिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में रूस के प्रतिष्ठित मास्को पालिटेक्निक विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और रूस के बीच शैक्षणिक, भाषाई, सांस्कृतिक एवं शोध सहयोग को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ना था। कार्यक्रम में रूस से आए विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, शोध कार्यक्रमों और छात्र विनिमय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
बदलती दुनिया में शिक्षा अब केवल कक्षा और पुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है। विद्यार्थियों के लिए वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई संभावनाओं से परिचित कराना आज समय की आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित “इंडो-रूस अकादमिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम” विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता दिखाई दिया।
विश्वविद्यालय के के.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ हिंदी एंड लिंग्विस्टिक्स स्थित विदेशी भाषा विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम का आयोजन रूस के प्रतिष्ठित मास्को पालिटेक्निक विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत और रूस के राष्ट्रीय ध्वजों के सम्मान तथा अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस दौरान वक्ताओं ने भारत और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा की तथा दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता मास्को पालिटेक्निक विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय निदेशालय की प्रमुख अलीना अंद्रूख रहीं। उनके साथ इंटरनेशनल सेल की कोऑर्डिनेटर अनास्तासिया एरोफेवा भी उपस्थित रहीं। दोनों विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए रूस की शिक्षा प्रणाली, विश्वविद्यालय जीवन, भाषा अध्ययन और शोध से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
अलीना अंद्रूख ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और रूस के बीच शैक्षणिक सहयोग केवल औपचारिक संबंध नहीं बल्कि पारस्परिक विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय विद्यार्थी प्रतिभाशाली हैं और उनमें नई भाषाओं एवं नई संस्कृतियों को सीखने की विशेष क्षमता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं बल्कि दुनिया को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रूस में इंजीनियरिंग, तकनीकी शिक्षा, मानविकी, भाषा अध्ययन और शोध के क्षेत्र में भारतीय विद्यार्थियों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं। वहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को शोध परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के अवसर भी प्राप्त होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान अनास्तासिया एरोफेवा ने भारतीय संस्कृति और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय विद्यार्थियों में नई भाषाओं को सीखने और वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं, शोध कार्यक्रमों और छात्र विनिमय कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी भी दी।
कार्यक्रम के दौरान एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने रूस की शिक्षा व्यवस्था, छात्रावास सुविधाओं, शोध गतिविधियों और भाषा अध्ययन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी सवालों के विस्तार से उत्तर देते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभवों से भी अवगत कराया।
संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि वर्तमान समय में विदेशी भाषाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रूसी भाषा और संस्कृति का अध्ययन विद्यार्थियों को केवल नई भाषा सीखने का अवसर नहीं देता बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार और शिक्षा के नए रास्ते भी खोलता है।
कार्यक्रम का एक आकर्षक हिस्सा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रहीं। विद्यार्थियों ने भारतीय और रूसी संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिन्होंने सभी का ध्यान आकर्षित किया। रूसी भाषा में संवाद प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक गतिविधियों ने पूरे कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। विद्यार्थियों ने अपनी भाषाई दक्षता और सांस्कृतिक समझ का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
विदेशी भाषा विभाग के अनुसार रूसी भाषा केवल एक विदेशी भाषा नहीं बल्कि रूस के साहित्य, विज्ञान, इतिहास और संस्कृति को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। भारतीय विद्यार्थियों में इसके प्रति बढ़ती रुचि भविष्य में शिक्षा, शोध और करियर के नए अवसरों को जन्म दे सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. आदित्य प्रकाश, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. संदीप सिंह और डॉ. अंगद सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़कर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
