आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस में 25 से 27 मई तक आयोजित तीन दिवसीय हस्तकला कार्यशाला ने छात्र-छात्राओं की रचनात्मक प्रतिभा को नई दिशा दी। कुलपति प्रो. आशु रानी के मार्गदर्शन में गृह प्रबंधन विभाग द्वारा पिडिलाइट के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को लिप्पन आर्ट, वर्ली आर्ट, मंडला आर्ट, पैच वर्क, टाइ एंड डाई और हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में कौशल विकास, नवाचार, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की भावना को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में करीब 30 छात्र-छात्राओं ने भाग लेते हुए कला के नए आयाम सीखे और “वेस्ट टू बेस्ट” की अवधारणा को भी समझा।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस में आयोजित तीन दिवसीय हस्तकला कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए सीखने और रचनात्मकता को नई पहचान देने वाला मंच बनकर सामने आई। विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देशन और गृह प्रबंधन विभाग के प्रयासों से आयोजित इस कार्यशाला ने छात्राओं को केवल कला से ही नहीं जोड़ा बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला का आयोजन 25 मई से 27 मई तक किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को विभिन्न कलात्मक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान कला और हस्तशिल्प के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि रचनात्मकता को सही दिशा मिले तो सामान्य वस्तुएं भी आकर्षक और उपयोगी उत्पादों में बदली जा सकती हैं।
तीन दिनों तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अलग-अलग प्रकार की कला शैलियों को करीब से जाना और स्वयं उन्हें तैयार करने का अनुभव भी प्राप्त किया। कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को लिप्पन आर्ट और वर्ली आर्ट जैसी लोकप्रिय कलाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इन कला विधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पारंपरिक भारतीय संस्कृति और आधुनिक सृजनात्मकता के बीच संबंध को समझने का अवसर मिला।
दूसरे दिन प्रशिक्षण का केंद्र आकर्षक डिजाइन और कलात्मक प्रयोगों पर रहा। विद्यार्थियों को खादी बैग पर मंडला आर्ट, पेंटिंग और पैच वर्क जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई। छात्राओं ने अलग-अलग डिजाइनों के जरिए अपने हुनर का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण के दौरान कई विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं को नए रूप में प्रस्तुत करते हुए आकर्षक कलात्मक वस्तुएं तैयार कीं।
कार्यशाला के अंतिम दिन विद्यार्थियों को हैंगिंग मिरर, टाइ एंड डाई दुपट्टा, एमडीएफ बोर्ड और पुट्टी के माध्यम से मंडला आर्ट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को यह समझाया गया कि हस्तनिर्मित वस्तुएं केवल शौक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों से भी जोड़ा जा सकता है।
कार्यक्रम की एक विशेषता “वेस्ट टू बेस्ट” की अवधारणा भी रही। छात्राओं को घरों में उपलब्ध पुरानी प्लेटों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग करने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से भी घर की सजावट के लिए आकर्षक साइड कॉर्नर, मिरर और सजावटी सामग्री तैयार की जा सकती है। इस पहल ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की सोच को भी मजबूत किया।
कार्यशाला में लगभग 30 छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों में नई चीजें सीखने का उत्साह और रचनात्मक सोच साफ दिखाई दी। कई छात्राओं ने अपनी कल्पनाशीलता और कला कौशल के माध्यम से आकर्षक आर्टिकल्स तैयार किए।
पिडिलाइट से आए विशेषज्ञ नरेंद्र सोलंकी ने विद्यार्थियों को हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं को तैयार करने की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने व्यावहारिक रूप से कई उपयोगी और सजावटी वस्तुएं बनाईं। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि कला और कौशल का बेहतर उपयोग भविष्य में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
कार्यशाला का संयोजन डॉ. प्रीति यादव ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों के अंदर छिपी प्रतिभा को सामने लाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। वहीं प्रो. अर्चना सिंह ने विद्यार्थियों के उत्साह और सीखने की ललक की सराहना करते हुए कहा कि कौशल आधारित शिक्षा आज के समय की आवश्यकता बन चुकी है और यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. कविता सिंह, डॉ. नेहा सक्सैना और डॉ. प्रिया यादव सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे। तीन दिवसीय यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक साबित हुई, बल्कि इसने उनके अंदर कला, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी और मजबूत किया।
