मथुरा। कभी सड़कों पर भीख मांगने और कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने को मजबूर रही मादा हथनी फूलकली ने अब आजादी के 14 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा बचाए जाने के बाद उसका जीवन पूरी तरह बदल गया।

लंबे समय तक शारीरिक कष्ट, कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने वाली फूलकली अब मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में सुरक्षित वातावरण में रह रही है। लगभग 70 वर्ष की उम्र में वह न केवल स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ी है, बल्कि अपने छोटे से हाथी समूह की मुखिया भी बन चुकी है। उसकी कहानी कठिन परिस्थितियों से निकलकर नए जीवन की ओर बढ़ने की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।
करीब पांच दशकों से अधिक समय तक कष्ट और संघर्ष भरा जीवन जीने वाली मादा हथनी फूलकली ने अब अपनी आजादी के 14 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कभी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर रहने वाली फूलकली का जीवन अब पूरी तरह बदल चुका है। उसकी कहानी केवल एक हाथी के बचाव की नहीं, बल्कि पीड़ा से सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने की कहानी बन गई है।

वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस ने फूलकली को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए थे। इसके बाद उसे मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में सुरक्षित स्थान पर लाया गया, जहां उसकी देखभाल और उपचार शुरू किया गया।
फूलकली ने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष बेहद कठिन परिस्थितियों में बिताए। उसका अधिकांश जीवन सड़कों पर भीख मांगने और लगातार यात्रा करने में बीता। उत्तर प्रदेश के आगरा क्षेत्र की व्यस्त सड़कों पर उसे रोजाना घंटों चलना पड़ता था। गर्म तारकोल वाली सड़कों पर लगातार चलने के कारण उसके पैरों में गंभीर समस्याएं विकसित हो गई थीं।
चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि फूलकली कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी। उसके पैरों में फोड़े, तलवों के फटने और संक्रमित घाव जैसी गंभीर परेशानियां थीं। इसके अलावा वह कुपोषण की शिकार भी थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि उसकी दाहिनी आंख में मोतियाबिंद की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिसके कारण वह उस आंख से देखने में असमर्थ हो चुकी थी।
हालांकि हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र पहुंचने के बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। वाइल्डलाइफ एसओएस की देखरेख और चिकित्सकीय सहायता के जरिए फूलकली के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला। पिछले 14 वर्षों में उसने अपने देखभालकर्ताओं और साथ रहने वाले हाथियों के साथ मजबूत रिश्ता विकसित किया है।

वर्तमान समय में लगभग 70 वर्ष की हो चुकी फूलकली अपने छोटे से समूह की मुखिया भी बन गई है। वह माया और एम्मा नाम की अन्य हथनियों के साथ रहती है। माया को पहले सर्कस से बचाया गया था, जबकि एम्मा को भी कठिन परिस्थितियों से मुक्त कराया गया था। अब यह तीनों हथनियां एक समूह के रूप में साथ रहती हैं और एक-दूसरे का सहारा बनी हुई हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस केंद्र में फूलकली की नियमित स्वास्थ्य देखभाल की जाती है। उसके अगले पैर में लंबे समय से बने फोड़े की ड्रेसिंग नियमित रूप से की जाती है। साथ ही उसके नाखूनों की देखभाल और आवश्यक चिकित्सा भी दी जाती है।
भीषण गर्मी के दौरान उसे राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। उसके बाड़े में पानी का पूल और फव्वारों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही उसके भोजन में तरबूज, खीरा और नारियल जैसे फलों को शामिल किया जाता है। संतुलित पोषण बनाए रखने के लिए उसे दलिया और आवश्यक स्वास्थ्यवर्धक सप्लीमेंट भी दिए जाते हैं।
फूलकली की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी दैनिक सैर भी है। वह प्रतिदिन एम्मा और माया के साथ समय बिताती है, जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहतर बनी रहती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा टीम के अनुसार तीनों हथनियों के बीच गहरा संबंध बन चुका है और उनकी आपसी संगति ने फूलकली के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फूलकली की यह यात्रा आज इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि उचित देखभाल, सुरक्षित वातावरण और संवेदनशील प्रयास किसी भी जीव के जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
