आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में इतिहास एवं संस्कृति विभाग तथा भारतीय इतिहास संकलन समिति के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीय जीवन के विविध आयाम” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सही इतिहास लेखन ही मजबूत राष्ट्र निर्माण का आधार बन सकता है। युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और देश के वास्तविक नायकों से परिचित कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संगोष्ठी में इतिहास के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जागृत करने, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेरणादायी संगोष्ठी में इतिहास की भूमिका, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशानुसार तथा इतिहास एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष प्रो. बी. डी. शुक्ला के नेतृत्व में इतिहास एवं संस्कृति विभाग एवं भारतीय इतिहास संकलन समिति के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृति भवन में “राष्ट्रीय जीवन के विविध आयाम” विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडे द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन के साथ किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संगोष्ठी का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास और संस्कृति की वास्तविक पहचान से जोड़ना तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को समझाना था।
प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए इतिहास एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष प्रो. बी. डी. शुक्ला ने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके इतिहास और संस्कृति से होती है। यदि युवा अपने इतिहास से जुड़ेंगे तो उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण की भावना स्वतः विकसित होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से देशहित में कार्य करने और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. बालमुकुंद पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान को दिशा देने और भविष्य का मार्ग तैयार करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इतिहास को एक विशेष विचारधारा के नजरिए से प्रस्तुत किया गया, जिससे देश के कई वास्तविक नायकों और महत्वपूर्ण घटनाओं को उचित स्थान नहीं मिल पाया। इसका असर नई पीढ़ी की सोच पर भी पड़ा और उनमें हीन भावना विकसित हुई।
उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है और भारत के गौरवशाली इतिहास को राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से पुनः प्रस्तुत करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। देश के स्वतंत्रता सेनानियों, वीर योद्धाओं, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक परंपराओं को सही रूप में सामने लाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास पर गर्व कर सकें।
डॉ. बालमुकुंद पांडे ने बताया कि देश के वास्तविक इतिहास को संकलित करने के उद्देश्य से 12 खंडों में इतिहास लेखन का कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही देश के लगभग 300 जिलों का इतिहास भी संकलित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इतिहास का सही दस्तावेजीकरण केवल शैक्षणिक कार्य नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह संगठन सचिव डॉ. संजय ने संगठनात्मक मूल्यों और सामाजिक समन्वय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संपर्क और संवाद किसी भी संगठन की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। जब समाज के लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं और सामूहिक रूप से कार्य करते हैं, तभी राष्ट्र मजबूत बनता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण सही इतिहास बोध के बिना संभव नहीं है। यदि युवाओं को उनके गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की सही जानकारी दी जाए तो वे समाज और देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शत्रुजीत, आदित्य, आकाश नारायण, प्रो. उमापति, प्रो. लवकुश, प्रो. सुगम आनंद, डॉ. पंकज शर्मा, राहुल शर्मा, कौशल राणा और प्रो. के. के. पचौरी सहित कई शिक्षकों और शोधार्थियों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही और उन्होंने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान राहुल द्वारा गणगीत की प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित लोगों में उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम का संचालन छात्र शिवम गुप्ता ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी के माध्यम से उपस्थित लोगों को इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के बीच गहरे संबंधों को समझने का अवसर मिला।
