आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान की चित्रकला विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ममता बंसल ने अंतरराष्ट्रीय कला मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। विभाग के निदेशक प्रो. संजय चौधरी के मार्गदर्शन एवं सहयोग में उन्होंने “हिमालय 2” अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी एवं कार्यशाला में प्रतिभाग किया। नेपाल के पोखरा आर्ट गैलरी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव में भारत सहित कई देशों के 100 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। हिमालय की मनोहारी वादियों के बीच आयोजित इस आयोजन में उनकी कलात्मक प्रस्तुति को प्रतिभागियों और कला प्रेमियों द्वारा सराहा गया। यह सहभागिता न केवल विश्वविद्यालय की कला परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने वाली बनी, बल्कि विद्यार्थियों और युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित हुई।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की एक शिक्षिका ने अंतरराष्ट्रीय कला मंच पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे शहर का नाम भी रोशन किया है। विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान के चित्रकला विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ममता बंसल ने अंतरराष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी एवं कार्यशाला “हिमालय 2” में प्रतिभाग कर कला जगत में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की कला परंपरा और शिक्षा जगत के लिए भी गर्व का विषय बन गई है। विभाग के निदेशक प्रो. संजय चौधरी के मार्गदर्शन और सहयोग में डॉ. ममता बंसल ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भाग लिया और अपनी कला के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक सोच और रचनात्मकता को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया।
नेपाल के पोखरा आर्ट गैलरी में जलेश्वर आर्ट फाउंडेशन द्वारा 15 मई से 21 मई तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव “हिमालय 2” में दुनिया के विभिन्न देशों से कलाकार शामिल हुए। यह आयोजन कला और संस्कृति के विविध रंगों का ऐसा मंच बना जहां विभिन्न देशों के कलाकारों ने अपनी सोच, संस्कृति और भावनाओं को कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
इस महोत्सव में भारत, नेपाल, इंडोनेशिया, थाईलैंड, स्पेन, मंगोलिया, वियतनाम और मलेशिया सहित विभिन्न देशों के 100 से अधिक प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी कला शैली के माध्यम से दर्शकों के सामने विविध विषयों को प्रस्तुत किया। प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियों में प्रकृति, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और मानवीय संवेदनाओं का विशेष समावेश देखने को मिला।
हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के बीच आयोजित इस कला आयोजन ने कलाकारों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक विशेष अवसर प्रदान किया। कलाकारों ने अपनी कल्पनाओं और विचारों को कैनवास पर उकेरते हुए कला के विभिन्न आयामों को सामने रखा। आयोजन में प्रस्तुत कलाकृतियों ने दर्शकों को भारतीय और वैश्विक संस्कृति की विविधता से परिचित कराया।
डॉ. ममता बंसल की प्रस्तुति भी इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मक सोच को प्रतिभागियों तथा कला प्रेमियों द्वारा काफी सराहा गया। उनकी कलाकृतियों में भारतीय कला और मानवीय संवेदनाओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजन कलाकारों को केवल अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर ही नहीं देते, बल्कि उन्हें विभिन्न देशों की कला परंपराओं और कार्यशैलियों को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। इससे कलाकारों के दृष्टिकोण का विस्तार होता है और उनकी रचनात्मक क्षमता को नई दिशा मिलती है।
डॉ. ममता बंसल की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है। इससे यह संदेश मिलता है कि निरंतर अभ्यास, समर्पण और रचनात्मक सोच के माध्यम से विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। यह उपलब्धि युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आई है।
विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ऐसी उपलब्धियां संस्थानों की पहचान को नई ऊंचाई देती हैं और विद्यार्थियों को अपने सपनों को बड़े स्तर पर देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करती हैं। डॉ. ममता बंसल की अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह सहभागिता विश्वविद्यालय और आगरा शहर के लिए गर्व का विषय बन गई है।
