आगरा। टीबी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और देश को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो द्वारा विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस छलेसर परिसर स्थित फार्मेसी विभाग में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को टीबी के लक्षण, बचाव, जांच और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार खांसी, वजन कम होना, सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर साबित हो सकता है। कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया गया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस छलेसर परिसर स्थित फार्मेसी विभाग में बुधवार को “टीबी मुक्त भारत” विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी के संरक्षण एवं सकारात्मक स्वास्थ्य जागरूकता दृष्टिकोण के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 “आगरा की आवाज” द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज के लोगों को टीबी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना तथा समय रहते इसके उपचार के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4 “आगरा की आवाज” द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, आगरा के सहयोग से किया गया। विश्वविद्यालय का सामुदायिक रेडियो लगातार टीबी उन्मूलन अभियान के तहत विभिन्न विभागों और विश्वविद्यालय मॉडल स्कूल में जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य जागरूकता को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे जनआंदोलन का रूप देना है, ताकि अधिक से अधिक लोग बीमारी के प्रति जागरूक हो सकें।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आगरा जिला अस्पताल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ कमल सिंह रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को टीबी के लक्षण, इसके बचाव के तरीके, जांच प्रक्रिया और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से दीं। उन्होंने बताया कि टीबी आज भी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि “टीबी मुक्त भारत मोबाइल अनुप्रयोग” लोगों तक सही स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाने और टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से लोगों को बीमारी से संबंधित आवश्यक जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सामुदायिक रेडियो कार्यक्रम अधिशासी पूजा सक्सेना ने विद्यार्थियों को बीमारी के शुरुआती संकेतों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहती है, बलगम के साथ खून आता है, लगातार बुखार रहता है, रात में अत्यधिक पसीना आता है, सीने में दर्द होता है, सांस लेने में परेशानी होती है या वजन तेजी से कम हो रहा हो तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत सरकारी अस्पताल जाकर जांच और उपचार कराना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच, उपचार और छाती का एक्स-रे निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय के अधिकारी और शिक्षक 125 महिला टीबी मरीजों को गोद लेकर समय-समय पर पोषण सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान जिला समन्वयक रविकांत गुप्ता ने बताया कि प्रदेश और आगरा जनपद में 24 मार्च 2026 से 100 दिवसीय “टीबी मुक्त भारत अभियान” चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत गांवों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक मंचों पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
फार्मेसी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शेखर ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और स्वास्थ्य जागरूकता को समाज सेवा का माध्यम बनाएं। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शिक्षकों को हेल्पलाइन नंबर 1800116666 की जानकारी दी गई तथा टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक भागीदारी का संकल्प दिलाया गया।
