आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 100वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह की तैयारियों के तहत आयोजित मेगा ऑडिशन में युवाओं का उत्साह देखने को मिला। ललित कला संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों और संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाओं ने भाग लिया। गायन, वादन, नृत्य और नाट्य विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक बड़ा मंच देने के साथ उनकी रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाना रहा।

शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना भी शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी होती है। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, ताकि वे केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित न रहकर कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों में भी अपनी अलग पहचान बना सकें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 100वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह के तहत मेगा ऑडिशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

ललित कला संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित यह कार्यक्रम युवा प्रतिभाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के आवासीय संस्थानों और संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इसके अलावा मथुरा और आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में युवा कलाकार कार्यक्रम में पहुंचे। मंच पर पहुंचने वाले प्रतिभागियों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई दिया।
ऑडिशन में विभिन्न कला विधाओं को शामिल किया गया था ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम में गायन, वादन, नृत्य और नाट्य विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। किसी ने अपने मधुर गीतों से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया तो किसी ने अपने नृत्य प्रदर्शन से माहौल को उत्साह से भर दिया। वहीं कई प्रतिभागियों ने अभिनय के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति और कला का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशानुसार तथा ललित कला संस्थान के निदेशक प्रो. संजय चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतिभागियों का चयन करना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना भी था जहां वे अपनी रचनात्मक क्षमताओं को खुलकर प्रस्तुत कर सकें।
प्रतिभागियों के चयन के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी मौजूद रही। संगीत विभागाध्यक्ष पंडित देवाशीष, संगीत प्रवक्ता डॉ. वैशाली, वादन विशेषज्ञ डॉ. कल्याणी, नृत्य विशेषज्ञ डॉ. नीरजा तथा नाट्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रोहित ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। चयन प्रक्रिया के दौरान प्रतिभागियों की कला, आत्मविश्वास और प्रस्तुति शैली जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया।
कार्यक्रम में पहले दिन कुल 96 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं ने यह संकेत दिया कि विद्यार्थियों में कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को लेकर काफी उत्साह मौजूद है। आयोजन समिति ने बताया कि ऑडिशन और पंजीकरण का अंतिम दिन 21 मई को रखा गया है, जहां और अधिक प्रतिभागियों के पहुंचने की संभावना जताई गई।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी पुरषोत्तम मयूरा ने संभाली। इसके अलावा डॉ. मनोज, दीपक कुलश्रेष्ठ तथा विद्यार्थी संयोजक समृद्धि, माधव और भानु ने कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शताब्दी समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को पहचान देने का अवसर भी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मक ऊर्जा को बाहर लाने के साथ-साथ उन्हें बड़े मंच तक पहुंचने की प्रेरणा भी देते हैं। प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में विद्यार्थियों की कलात्मक और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत करेंगे तथा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेंगे।

