सार
आगरा में बेसिक शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में लापरवाही और फर्जीवाड़े पर बड़ा एक्शन लिया है। सैंया क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय शेरपुर में निरीक्षण के दौरान स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला, जबकि बच्चे गेट और बाउंड्री पार कर स्कूल के अंदर जा रहे थे। इस मामले में प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। वहीं दूसरे मामले में फर्जी हस्ताक्षर और बिना सूचना गैरहाजिर रहने वाले सहायक शिक्षक पर भी कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग ने दोनों मामलों की जांच भी शुरू कर दी है।

आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में लापरवाही और नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने अलग-अलग मामलों में एक प्रधानाध्यापक और एक सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया है। साथ ही संबंधित मामलों में जांच बैठाकर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहला मामला सैंया विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय शेरपुर का है, जहां निरीक्षण के दौरान बेहद चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। 12 मई को खंड विकास अधिकारी सैंया ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह करीब साढ़े आठ बजे जब अधिकारी स्कूल पहुंचे तो विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ मिला। हैरानी की बात यह रही कि स्कूल आने वाले बच्चे गेट छोटा होने के कारण उसके ऊपर चढ़कर और बाउंड्री फांदकर स्कूल परिसर के अंदर प्रवेश कर रहे थे।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक जितेंद्र पिप्पल के पास विद्यालय की चाबी तक उपलब्ध नहीं थी। स्थिति ऐसी बन गई कि निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को भी बाउंड्री पार करके विद्यालय परिसर में प्रवेश करना पड़ा। कुछ समय बाद विद्यालय का अन्य स्टाफ भी मौके पर पहुंचा।
मामले को प्रशासन ने अत्यंत गंभीर माना। मुख्य विकास अधिकारी की संस्तुति के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई कर दी। इसके अलावा विद्यालय के अन्य स्टाफ के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए 12 मई का वेतन और मानदेय रोक दिया गया।
विभाग ने मामले की विस्तृत जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी शमशाबाद जगत सिंह राजपूत को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
उधर दूसरा मामला प्राथमिक विद्यालय कछपुरा से सामने आया, जहां सहायक अध्यापक लोकेश बाबू पर विभागीय नियमों के उल्लंघन और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगा। जानकारी के अनुसार 18 अप्रैल को विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाए गए थे।
मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित शिक्षक ने चिकित्सीय अवकाश लेने के लिए फर्जी तरीके का सहारा लिया था। जांच अधिकारियों को यह भी पता चला कि उपस्थिति पंजिका में बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के नाम पर हस्ताक्षर दर्ज किए गए थे, जबकि वास्तविकता में उनकी किसी प्रकार की परीक्षा ड्यूटी लगाई ही नहीं गई थी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि यह केवल अनुपस्थिति का मामला नहीं बल्कि विभागीय अभिलेखों में गलत जानकारी दर्ज करने और फर्जी तरीके से दस्तावेज प्रस्तुत करने का मामला भी है। इसलिए इसे गंभीरता से लिया गया।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी संबंधित शिक्षक को कार्यशैली में सुधार लाने के लिए चेतावनी जारी की गई थी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। लगातार सामने आ रही शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद संबंधित शिक्षक को पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला छाहरी से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की जांच की जिम्मेदारी बाह के खंड शिक्षा अधिकारी अमरनाथ को सौंपी गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य से जुड़े संस्थान हैं और वहां किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में अनुशासन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
