आगरा। स्मार्ट सिटी कार्यालय और इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी मनीष बंसल ने डेटा आधारित निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल डेटा एकत्र करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका विश्लेषण कर संबंधित विभागों तक पहुंचाना भी जरूरी है। निरीक्षण के दौरान एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, सॉलिड वेस्ट कलेक्शन, राजस्व संग्रह, माई आगरा ऐप और आईटीएमएस सिस्टम की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय और इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का जिलाधिकारी मनीष बंसल ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं और तकनीकी प्रणालियों की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कई बिंदुओं पर अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि तकनीक और डेटा का उद्देश्य केवल सूचनाएं इकट्ठा करना नहीं, बल्कि उन सूचनाओं का उपयोग कर जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाना होना चाहिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सबसे पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मॉनिटरिंग सिस्टम की समीक्षा की। अधिकारियों ने जानकारी दी कि शहर में 39 स्थानों पर रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग की जा रही है और विभिन्न क्षेत्रों से लगातार प्रदूषण संबंधी डेटा प्राप्त हो रहा है। जिलाधिकारी ने विभिन्न स्थानों के अलग-अलग समय के प्रदूषण स्तर का विश्लेषण देखा और इस दौरान डेटा के उपयोग को लेकर असंतोष जताया।

उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े एकत्र कर लेना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक उद्देश्य यह होना चाहिए कि डेटा का गहन विश्लेषण कर संबंधित विभागों तक पहुंचाया जाए ताकि सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों को डेटा आधारित रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे जिन क्षेत्रों में प्रदूषण अधिक है वहां प्रभावी नियंत्रण और सुधार के उपाय लागू किए जा सकें।

निरीक्षण के दौरान इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से नगर निगम के राजस्व संग्रह और वार्डवार मांग संबंधी आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने राजस्व संग्रह व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और परिणाम आधारित बनाने के लिए निर्देश दिए कि शहर के वार्डों को व्यावसायिक और आवासीय श्रेणियों के अनुसार वर्गीकृत किया जाए।

उन्होंने कहा कि वार्डों के स्वरूप और कर संग्रह क्षमता के आधार पर अलग-अलग श्रेणी बनाकर डेटा विश्लेषण किया जाए तथा उसी के आधार पर राजस्व निरीक्षकों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए जाएं। इससे राजस्व वसूली प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

निरीक्षण के दौरान सॉलिड वेस्ट कलेक्शन और उसकी मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि शहर में अब तक 4,00,553 घरों का सर्वे किया जा चुका है। इनमें से 1,63,930 घरों में कूड़ा संग्रहण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में संकरी गलियों और अन्य भौतिक बाधाओं के कारण कूड़ा संग्रहण वाहन नहीं पहुंच पाते हैं, इसलिए वहां हाथ ठेला और अन्य वैकल्पिक साधनों के माध्यम से कूड़ा संग्रहण किया जा रहा है।
इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि हाथ ठेला से कूड़ा एकत्र करने वाले सफाई कर्मचारियों को भी स्कैनर सुविधा उपलब्ध कराई जाए और मोबाइल ऐप को मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाए, ताकि वास्तविक समय पर डेटा उपलब्ध हो सके। साथ ही उन्होंने प्रतिदिन कूड़ा संग्रहण संबंधी डेटा की समीक्षा और निगरानी करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान माई आगरा ऐप के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और उनके निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने दैनिक आधार पर आने वाली शिकायतों, लंबित मामलों और उनके समाधान की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को त्वरित राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि तकनीकी प्लेटफॉर्म तभी प्रभावी साबित होंगे जब लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान होगा। शिकायतों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि गंभीरता से लेकर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े रियल टाइम डेटा की भी समीक्षा की। उन्होंने रेड लाइट जंप करने, बिना हेलमेट वाहन चलाने और ट्रिपल राइडिंग जैसी घटनाओं के आंकड़ों का अवलोकन किया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आईटीएमएस के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर संबंधित विभागों को उपलब्ध कराया जाए ताकि सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियम बनाने से नहीं बल्कि नियमों के प्रभावी अनुपालन से सुनिश्चित होती है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तकनीकी संसाधनों और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली का अधिकतम उपयोग कर शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के प्रयास किए जाएं।
निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार सहित स्मार्ट सिटी और नगर निगम से जुड़े अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि तकनीकी व्यवस्था और डेटा विश्लेषण के माध्यम से शहर की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहित केंद्रित बनाया जाए।
