वृंदावन/मथुरा। भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय धार्मिक उत्सव का समापन भव्य शोभायात्राओं के साथ हुआ। वृंदावन और गोवर्धन में निकाली गई शोभायात्राओं में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान परशुराम की फूलों से सजी प्रतिमा, आकर्षक झांकियां, पुष्प वर्षा और जयकारों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय दिखाई दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत कर धर्म और आस्था का संदेश दिया।

भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय धार्मिक उत्सव का शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा के साथ समापन हुआ। शोभायात्रा में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे मार्ग पर भगवान परशुराम के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा सहित विभिन्न ब्राह्मण संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से इस भव्य आयोजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मथुरा, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सहित कई जनपदों से बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक उत्साह से सराबोर श्रद्धालु पूरे मार्ग में भगवान परशुराम के जयकारे लगाते हुए दिखाई दिए।

शोभायात्रा की शुरुआत रंगनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई। भगवान परशुराम की प्रतिमा को फूलों से सजे भव्य डोले में विराजमान किया गया। पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारकर शोभायात्रा को रवाना किया। आयोजन समिति ने बाहर से आए श्रद्धालुओं और अतिथियों का पटका पहनाकर स्वागत किया।

शोभायात्रा रंगनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर चुंगी चौराहा, अनाज मंडी, प्रताप बाजार, रेतिया बाजार, लोई बाजार, बनखंडी, राधाबल्लभ मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, दुसायत मोहल्ला और हरिनीकुंज होते हुए परशुराम पार्क पहुंची। यहां भगवान परशुराम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

यात्रा में शामिल झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रहीं। भगवान गणेश, गौरी शंकर, देवी दुर्गा, भगवान राम, राधा-कृष्ण, माता काली, हनुमान जी और सालासर बालाजी की झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सप्त ऋषियों के स्वरूपों को घोड़ों पर विराजमान किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।
माता काली का स्वरूप धारण किए कलाकार यात्रा के दौरान आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने रहे। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत धार्मिक स्वरूपों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखाई दिए। यात्रा के मार्ग पर कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान परशुराम की शोभायात्रा का स्वागत किया।
इसी क्रम में गोवर्धन में भी भगवान परशुराम की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। गोवर्धन स्थित मुकुट मुखारबिंद तिराहा के पास सीताराम धर्मशाला में सबसे पहले भगवान गणेश और भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उपस्थित गणमान्य लोगों ने भगवान परशुराम के जीवन, आदर्शों और उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
पूजन के पश्चात शोभायात्रा सीताराम धर्मशाला से प्रारंभ होकर दसवीसा, सौंख अड्डा, दानघाटी मंदिर और बड़ा बाजार सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर निकाली गई। शोभायात्रा में अनेक धार्मिक झांकियां शामिल रहीं और विप्र बंधु बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने स्वागत और सत्कार कर धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
शोभायात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय दिखाई दिया और श्रद्धालु भगवान परशुराम के जयकारों के साथ धर्म और आस्था के रंग में रंगे नजर आए।
