डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला संस्थान में “मोनुमेंटल स्कल्पचर क्ले मॉडलिंग कार्यशाला” का शुभारंभ हो गया है। 16 मई से 2 जून तक चलने वाली इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को विशाल मूर्तिकला निर्माण, क्ले मॉडलिंग, शरीर संरचना अध्ययन और संरचनात्मक निर्माण जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण आठ फीट ऊंची नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का निर्माण रहेगा, जिसे शिक्षक और छात्र मिलकर तैयार करेंगे ।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कला और रचनात्मकता को नई दिशा देने के उद्देश्य से ललित कला संस्थान के मूर्ति कला विभाग द्वारा आयोजित “मोनुमेंटल स्कल्पचर क्ले मॉडलिंग कार्यशाला” का शुक्रवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी के संरक्षण तथा ललित कला संस्थान के निदेशक प्रोफेसर संजय चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला 16 मई से 2 जूनतक ललित कला संस्थान, संस्कृत भवन, सिविल लाइंस, आगरा में संचालित होगी।
कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के सभी शिक्षकगणों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ के साथ ही विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र-छात्राओं ने इसे अपनी प्रतिभा को निखारने और नई तकनीकों को सीखने का बेहतर अवसर बताया।
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता लगभग आठ फीट ऊंची नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का निर्माण रहेगा। इस प्रतिमा को मूर्ति कला विभाग के शिक्षक और छात्र-छात्राएं सामूहिक रूप से तैयार करेंगे। प्रतिमा निर्माण के दौरान विद्यार्थियों को विशाल आकार की मूर्तियों के निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी बारीकियों और तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी।
कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विशाल मूर्तिकला निर्माण, मिट्टी के माध्यम से आकृति निर्माण, शरीर संरचना अध्ययन तथा संरचनात्मक निर्माण जैसी विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा। इससे उन्हें मूर्तिकला के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी कलात्मक क्षमता को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
मूर्ति कला विभाग के शिक्षक डॉ. गणेश कुशवाहा कार्यशाला का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल कला के तकनीकी पहलुओं से ही परिचित नहीं करातीं बल्कि उनमें रचनात्मक सोच, नवीनता और टीमवर्क की भावना को भी मजबूत करती हैं। उनका कहना है कि जब विद्यार्थी सामूहिक रूप से किसी बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य करते हैं तो उनमें एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करने की क्षमता विकसित होती है, जो भविष्य में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में कला के क्षेत्र में नए प्रयोगों और तकनीकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक हो जाता है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होने वाली इस कार्यशाला में संस्थान के विद्यार्थियों के साथ-साथ बाहरी प्रतिभागी भी भाग ले सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से संस्थान के विद्यार्थियों के लिए पंजीकरण निःशुल्क रखा गया है, जबकि बाहरी प्रतिभागियों के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं, जिससे उनकी प्रतिभा को नई पहचान और बेहतर मंच मिल सकेगा।
