डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के विदेशी भाषा विभाग में संचालित छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत रूस के एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय से आए चार छात्रों के पांचवें बैच का तीन माह का पाठ्यक्रम पूरा हो गया। इस दौरान छात्रों ने हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य का अध्ययन किया। समापन समारोह में छात्रों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की बात कही।
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के केएमआई स्थित विदेशी भाषा विभाग में संचालित छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत रूस के प्रतिष्ठित एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय से आए चार छात्रों के पांचवें बैच के पाठ्यक्रम का गुरुवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में छात्रों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा उनके तीन माह के अनुभवों और उपलब्धियों को साझा किया गया।
यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय, मास्को, रूस के बीच हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों से यह शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम निरंतर सक्रिय रूप से संचालित हो रहा है। अब तक रूस से छात्रों के पांच दल विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए आ चुके हैं, जबकि विदेशी भाषा विभाग से छात्रों के तीन दल अध्ययन हेतु रूस भेजे जा चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार रूस से छात्रों का छठा दल आगामी सितंबर माह में आगरा पहुंचेगा।
तीन माह के इस विशेष पाठ्यक्रम के दौरान रूसी छात्रों ने हिंदी भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य का गहन अध्ययन किया। इसके अतिरिक्त उन्हें भारतीय सामाजिक जीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को निकट से समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी भाग लिया, जिससे उन्हें भारत की विविधता और परंपराओं को समझने में सहायता मिली।
इसी क्रम में विदेशी भाषा विभाग से भी तीन छात्रों का एक दल रूसी भाषा के अध्ययन और शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत रूस भेजा गया था। यह छात्र दल तीन माह तक रूस में अध्ययन करने के बाद नौ मई 2026 को भारत वापस लौटा। इस दौरान छात्रों ने रूसी भाषा का अध्ययन करने के साथ-साथ वहां की संस्कृति, साहित्य और सामाजिक जीवन को भी करीब से समझा। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर भारत और रूस के मध्य शैक्षिक संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनेक विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है और आने वाले समय में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी समझौता ज्ञापन किए जाएंगे। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक वैश्विक स्तर पर सहभागिता कर नई संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
विद्यापीठ के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर ने इसे विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा जगत में विश्वविद्यालय की पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में उज़्बेक राज्य विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के अंतर्गत उज़्बेकिस्तान से छात्रों का एक दल आगरा आएगा तथा यहां के छात्र अध्ययन के लिए उज़्बेकिस्तान जाएंगे। इसके अतिरिक्त रूस के अलावा फ्रांस के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ भी लगातार संपर्क बनाए रखा गया है।
समारोह के दौरान रूसी छात्र-छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। छात्रा दारिया सिर्गेएवा ने कहा कि उन्हें भारत की संस्कृति, यहां का खान-पान और लोगों का व्यवहार बेहद पसंद आया तथा वह भविष्य में फिर भारत आना चाहेंगी। छात्र गिओर्गी मेलिकिआन ने विश्वविद्यालय में अध्ययन को यादगार अनुभव बताया। छात्र पावेल अर्मेएव ने कहा कि हिंदी के मूलभाषी शिक्षकों से अध्ययन करना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा। वहीं छात्रा गलीना बकारेवा ने तीन माह के अनुभव को ज्ञानवर्धक और जीवन बदलने वाला बताया।
समापन समारोह में आदित्य प्रकाश, विशाल शर्मा, अंगद, कृष्ण कुमार और संदीप सिंह सहित विदेशी भाषा विभाग के शिक्षक उपस्थित रहे।

