1. खंदारी क्षेत्र की बस्तियों में सामुदायिक पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
2. बीएससी होम साइंस की छात्राओं ने तैयार किए कम लागत वाले पोषण उत्पाद
3. महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार व एनीमिया रोकथाम की दी गई जानकारी
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खाद्य एवं पोषण विभाग द्वारा खंदारी क्षेत्र की बस्तियों में सामुदायिक पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बीएससी होम साइंस षष्ठम सेमेस्टर की छात्राओं ने कम लागत वाले पौष्टिक उत्पाद तैयार कर प्रदर्शित किए और महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम तथा कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खाद्य एवं पोषण विभाग द्वारा खंदारी क्षेत्र की बस्तियों में सामुदायिक पोषण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण में संपन्न हुआ।
कम्युनिटी न्यूट्रिशन पाठ्यक्रम के अंतर्गत इस कार्यक्रम का संचालन प्रो. अर्चना सिंह के निर्देशन में शिक्षिका डॉ. प्रिया यादव द्वारा किया गया। इसमें बीएससी होम साइंस षष्ठम सेमेस्टर की छात्राओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। छात्राओं में ज्योति चौहान, कामाक्षी सिंह एवं खुशी दिवाकर शामिल रहीं, जिन्होंने बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं के लिए कम लागत वाले प्रोटीन एवं आयरन युक्त पोषण उत्पाद तैयार किए।
इन छात्राओं द्वारा आयरन युक्त पाउडर, प्रोटीन रिच पाउडर, दलिया प्रीमिक्स, पुडिंग पाउडर एवं मल्टीग्रेन प्रीमिक्स जैसे पौष्टिक उत्पाद विकसित किए गए। इसके साथ ही सत्तू-गुड़ लड्डू, आयरन बूस्ट प्रोटीन पाउडर, बाजरा-गुड़ कुकीज़ एवं पौष्टिक मठरी जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ भी तैयार कर समुदाय के बीच प्रदर्शित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार के महत्व, आयरन एवं प्रोटीन की आवश्यकता, एनीमिया की रोकथाम तथा कुपोषण से बचाव के प्रति विस्तार से जागरूक किया गया। डॉ. प्रिया यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि ये पोषण उत्पाद रसोई में उपलब्ध सामान्य सामग्रियों से पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों द्वारा घर पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इन प्रोटीन पाउडरों को सुरक्षित रूप से संग्रहित कर बाद में विभिन्न पोषणयुक्त व्यंजन बनाने में उपयोग किया जा सकता है। साथ ही बच्चों के दैनिक आहार में इन्हें शामिल कर उनकी पोषण गुणवत्ता को प्रभावी रूप से बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस प्रकार के नवाचार आधारित पोषण उत्पाद ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं। छात्राओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखकर स्थानीय महिलाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और उनकी सराहना की।
स्थानीय समुदाय ने विश्वविद्यालय की इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें दैनिक जीवन में स्वस्थ आहार अपनाने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में महिलाओं ने न केवल जानकारी प्राप्त की बल्कि उत्पादों की तैयारी की प्रक्रिया को भी समझा।
यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का माध्यम बना, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार की दिशा में एक प्रभावी और प्रेरणादायी पहल के रूप में भी सामने आया। विश्वविद्यालय द्वारा की गई यह कोशिश भविष्य में भी समाज के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की और ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
