आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कुलपति आशु रानी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक पालीवाल पार्क परिसर स्थित बृहस्पति भवन में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य राज्यपाल सचिवालय उत्तर प्रदेश द्वारा प्रस्तावित समीक्षा बैठक की तैयारियों की समीक्षा करना था। इसमें लगभग 22 महाविद्यालयों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। कुलपति ने निर्देश दिए कि महाविद्यालय अपनी उपलब्धियों, शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं को प्रभावी, आकर्षक और तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करें।

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति आशु रानी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित बृहस्पति भवन में आयोजित की गई।

यह बैठक राज्यपाल सचिवालय उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा प्रस्तावित समीक्षा बैठक के दृष्टिगत महाविद्यालयों की तैयारियों की समीक्षा एवं आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
बैठक में लगभग 22 राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने सहभागिता की और अपने-अपने संस्थानों की विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। सभी प्राचार्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आवश्यक सुझाव भी प्राप्त किए।
कुलपति आशु रानी ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे अपनी शैक्षिक उपलब्धियों, गुणवत्ता, नवाचारों एवं विशिष्ट कार्यों को प्रभावी एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि प्रस्तुति में संस्थान का इतिहास, उसकी प्राचीनता, वर्तमान उपलब्धियाँ एवं भविष्य की योजनाएँ स्पष्ट रूप से परिलक्षित होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सेल्फ फाइनेंस एवं प्रबंध समिति के बजट को पृथक रूप से प्रस्तुत किया जाए तथा भविष्य की आवश्यकताओं एवं संभावनाओं को भी प्रस्तुति में शामिल किया जाए।
कुलपति ने पीएम उषा योजना के अंतर्गत संभावित अनुदान को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए कि महाविद्यालय 100 वर्षों की विकास योजना तैयार करें। इस योजना में नई इमारतों का निर्माण, आधारभूत संरचना का विकास तथा शैक्षिक विस्तार की विस्तृत रूपरेखा शामिल होनी चाहिए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सभी महाविद्यालय अपनी पीपीटी नैक मानकों के अनुरूप तैयार करें। यदि किसी महाविद्यालय का पूर्व में नैक मूल्यांकन हुआ है तो उसकी ग्रेड की जानकारी भी प्रस्तुति में अवश्य शामिल की जाए।
कुलपति ने यह भी कहा कि महाविद्यालय अपनी कमियों और चुनौतियों को भी पारदर्शी रूप से प्रस्तुत करें ताकि उनके समाधान हेतु ठोस योजना बनाई जा सके। उन्होंने शिक्षकों की स्थिति, आधारभूत सुविधाओं की कमी एवं उनसे उत्पन्न समस्याओं को भी प्रस्तुति में सम्मिलित करने पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, गोष्ठियाँ, आउटरीच गतिविधियाँ तथा छात्र कल्याण योजनाएँ प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।
कुलपति ने स्पष्ट किया कि महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली प्रस्तुति में स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए तथा परिसर की गतिविधियाँ, जीवंतता और सक्रियता फोटो एवं आंकड़ों के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रदर्शित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी फोटोग्राफ जियो टैग एवं कैप्शन सहित हों तथा प्रत्येक स्लाइड में अधिकतम दो फोटो ही सम्मिलित किए जाएँ।
बैठक में कुलसचिव अजय कुमार मिश्रा एवं परीक्षा नियंत्रक ओमप्रकाश सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सभी प्राचार्यों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियाँ दीं और विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को गंभीरता से लेते हुए आगामी समीक्षा बैठक की तैयारी शुरू करने का आश्वासन दिया।

