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Agra News: आगरा में हरियाली पर बड़ा मंथन, निजी भूमि वृक्षारोपण और वन आवरण पर उठे गंभीर सवाल

District Environmental Committee meeting in Agra discussing tree plantation on private land, green cover issues, pollution control, and Uttari Bypass traffic diversion plan
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आगरा: आगरा में जिला पर्यावरण समिति की बैठक में हरित आवरण, वृक्षारोपण नीति, ट्रैफिक प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी हरियाली जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जनपद में वन आवरण मात्र 6 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय लक्ष्य 33 प्रतिशत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने निजी भूमि पर वृक्षारोपण में आ रही कानूनी बाधाओं और नीतिगत खामियों को उठाते हुए कहा कि किसानों और निजी भू-धारकों के लिए पेड़ लगाना व्यवहारिक रूप से कठिन होता जा रहा है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए परीक्षण का आश्वासन दिया और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।

जिला पर्यावरण समिति की बैठक में हरित आगरा, वृक्षारोपण नीति, वायु प्रदूषण नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी हरियाली को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। बैठक में यह तथ्य प्रमुखता से सामने आया कि जनपद आगरा का वन आवरण लगभग 6 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय वन आवरण औसतन 22 प्रतिशत है और राष्ट्रीय लक्ष्य 33 प्रतिशत निर्धारित है।

बैठक में यह गंभीर प्रश्न भी उठाया गया कि जब 10400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले टीटीजेड (Taj Trapezium Zone) क्षेत्र में वन आवरण लगभग 3 प्रतिशत है और आगरा में यह लगभग 6 प्रतिशत है, तथा सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण लगभग पूर्ण हो चुका है, तो निजी भूमि पर वृक्षारोपण के बिना हरियाली कैसे बढ़ाई जा सकती है और पर्यावरण में वास्तविक सुधार कैसे संभव है। यह भी कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में किसान और निजी भू-धारक वृक्षारोपण करने से डर रहे हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने बैठक में कहा कि यदि किसी किसान को पेड़ काटने की अनुमति लेनी होती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ सकता है और शर्तों के अनुसार एक पेड़ काटने पर दस पेड़ लगाने का नियम लागू हो जाता है। ऐसी स्थिति में निजी भूमि स्वामी या किसान पेड़ लगाने से हतोत्साहित होता है। उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया कि ऐसी नीतिगत स्थिति में कोई भी निजी व्यक्ति वृक्षारोपण क्यों करेगा। इस पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए परीक्षण कराने का आश्वासन दिया।

बैठक में अधिवक्ता केसी जैन द्वारा उत्तरी बाईपास के माध्यम से गैर-गंतव्य भारी वाहनों को डायवर्ट करने का मुद्दा भी उठाया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1996 एवं 2006 में आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन उत्तरी बाईपास बनने के बावजूद भारी वाहनों को शहर में प्रवेश से पूरी तरह रोका नहीं गया है। इस पर जिलाधिकारी ने ट्रैफिक इंस्पेक्टर से चर्चा कर स्थिति समझी और पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर भारी वाहनों को रोकने के निर्देश दिए। साथ ही कीठम के पास और कुबेरपुर पर बैरियर लगाकर ट्रैफिक डायवर्जन सुनिश्चित करने की बात कही गई।

बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि सार्वजनिक पार्कों में मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण करने पर बच्चों और स्थानीय निवासियों के उपयोग के लिए स्थान सीमित हो जाता है। अधिवक्ता ने कहा कि पार्क सार्वजनिक उपयोग के लिए होते हैं और उनमें अत्यधिक सघन वृक्षारोपण व्यावहारिक नहीं है।

साथ ही पार्कों में हॉर्टिकल्चर वेस्ट निस्तारण के लिए गड्ढे बनाए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, जिसका अनुपालन पर्याप्त रूप से नहीं हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि नगर निगम द्वारा किए जाने वाले वृक्षारोपण में एवेन्यू प्लांटेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिसमें अमलतास, गुलमोहर जैसे पेड़ लगाए जाएं ताकि सड़क किनारे हरियाली विकसित हो सके। अधिवक्ता ने सुझाव दिया कि नगर निगम को सड़कों पर ट्री-गार्ड के साथ अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए ताकि शहरी हरियाली बढ़ सके। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक स्थान पर मियावाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण से पूरे शहर को समान लाभ नहीं मिल पाता।

नगर निगम द्वारा प्रस्तावित लगभग दो लाख पौधों के वृक्षारोपण में से 10 प्रतिशत पौधों की योजना पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देश दिए कि वायु गुणवत्ता सुधार के लिए बिंदुवार कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि कहां-क्या कार्य किए जाएंगे ताकि प्रदूषण नियंत्रण के ठोस उपाय सुनिश्चित हो सकें। साथ ही यह भी पूछा गया कि नगर निगम की कुल सड़कों में कितने प्रतिशत हिस्से पर दोनों ओर टाइल्स लगाई गई हैं, जिससे रोड डस्ट को रोका जा सके।

इसके अतिरिक्त संजय प्लेस क्षेत्र में फुटपाथ व्यवस्था सुधार की योजना तैयार करने के निर्देश भी नगर निगम को दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली बढ़ाने के लिए समन्वित और व्यावहारिक योजना तैयार करने पर जोर दिया।

इस बैठक में अपर जिलाधिकारी, नगर निगम अधिकारी, पर्यावरण समिति के सदस्य एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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