आगरा। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य, जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह, डिप्टी सीएमओ सुरेंद्र मोहन प्रजापति, डीसी एनआरएलएम राजन राय सहित सभी सीडीपीओ, रॉकेट लर्निंग एवं प्रथम संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में पोषण ट्रैकर, सैम-मैम बच्चों की स्थिति, पुष्टाहार वितरण, एनआरसी संचालन और आंगनबाड़ी सेवाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में सर्वप्रथम जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य द्वारा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग का विस्तृत प्रस्तुतीकरण जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी तलब की। इसमें पोषण ट्रैकर ऐप पर ब्लॉकवार सैम-मैम बच्चों का विवरण, बच्चों का वजन, लंबाई, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा गृह भ्रमण की स्थिति, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की अद्यतन स्थिति, टीएचआर यूनिटों का संचालन, पुष्टाहार आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था, केंद्रों पर उपलब्ध संसाधन, ईसीसी किट, प्री-स्कूल किट तथा नवीन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली गई।

जिलाधिकारी मनीष बंसल ने निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका अब केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है। उन्होंने पोषण ट्रैकर ऐप पर शत-प्रतिशत फीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाए और उसी के आधार पर अधिगम क्रियाएं एवं एक्टिविटी प्लान बनाया जाए। बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक, भाषाई और गणितीय विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए रॉकेट लर्निंग मॉड्यूल और प्रथम संस्था के माध्यम से प्री-प्राइमरी शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की प्रभावी ट्रेनिंग अनिवार्य है। 25 कार्यकत्रियों पर एक मास्टर ट्रेनर तैयार कर 15 दिनों में सभी का प्रशिक्षण पूर्ण कराया जाए।
बैठक में सैम-मैम बच्चों की स्थिति की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि आगरा शहर में 338 सैम बच्चे, ब्लॉक एत्मादपुर में 181, बिचपुरी में 162, खंदौली में 111 तथा ब्लॉक सैंया में 108 सैम बच्चे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और सभी सीडीपीओ से जवाब तलब किया।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सीडीपीओ फील्ड विजिट कर डेटा की सत्यता जांचें और प्रत्येक ब्लॉक से 10-10 सैम बच्चों की फाइंडिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसी भी केंद्र पर बेड खाली नहीं रहना चाहिए और सभी गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर भर्ती एवं उपचार मिलना चाहिए।
टीएचआर यूनिटों और पुष्टाहार वितरण व्यवस्था की गहन समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि अब तक जो व्यवस्था रही है वह स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत पुष्टाहार वितरण सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी नहीं चलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही या शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी सीडीपीओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि पोषण ट्रैकर ऐप पर सैम बच्चों की फीडिंग समय पर हो और डेटा अपडेट नियमित रूप से किया जाए। बच्चों की उपस्थिति, वजन और लंबाई का वास्तविक रिकॉर्ड दर्ज किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से कार्य में पारदर्शिता आती है और विश्वसनीयता बढ़ती है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्य, जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह, डिप्टी सीएमओ सुरेंद्र मोहन प्रजापति, डीसी एनआरएलएम राजन राय सहित सभी सीडीपीओ उपस्थित रहे। इसके अलावा रॉकेट लर्निंग एवं प्रथम संस्था के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
अंत में सभी सीडीपीओ ने व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने और पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी ने कुपोषण उन्मूलन, केंद्रों की साफ-सफाई, बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण सेवाओं में सुधार के लिए सभी को प्रेरित किया।
