गौ संरक्षण को लेकर फतेहाबाद में बड़ा जनआंदोलन
गौभक्तों ने राष्ट्रीय नीति और सख्त कानून की उठाई मांग
तहसील परिसर में सौंपा गया हस्ताक्षर अभियान सहित ज्ञापन
फतेहाबाद। सोमवार को गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत गौभक्तों ने एक बार फिर गौसंरक्षण को लेकर बड़ा संदेश दिया। बड़ी संख्या में गौभक्त तहसील परिसर पहुंचे और उपजिलाधिकारी स्वाति शर्मा को राष्ट्रपति के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए और देश में गौवंश संरक्षण के लिए एक सख्त, स्पष्ट और प्रभावी राष्ट्रीय नीति लागू की जाए। गौभक्तों ने कहा कि गौवंश केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस दौरान हस्ताक्षर अभियान की प्रतियां भी प्रशासन को सौंपी गईं और इसे एक जनजागरूकता आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही गई।

सोमवार को तहसील परिसर में उस समय विशेष माहौल देखने को मिला जब गौ सम्मान आह्वान अभियान से जुड़े गौभक्त बड़ी संख्या में एकत्र हुए। सभी ने एक स्वर में गौसंरक्षण की मजबूत नीति की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी स्वाति शर्मा को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संस्कृति में गौवंश का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन है। वैदिक काल से ही गाय को जीवनदायिनी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। गौभक्तों ने कहा कि गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन प्रणाली का आधार है। कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी क्षेत्रों में गाय का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान रहा है।
अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा कि आज के समय में गौवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। कई स्थानों पर गौवंश सड़कों पर भटकता दिखाई देता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि उचित सरकारी संरक्षण और प्रभावी नीति के अभाव में यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
गौभक्तों ने यह भी कहा कि गौ आधारित जीवनशैली न केवल पारंपरिक महत्व रखती है, बल्कि आधुनिक समय में भी इसका वैज्ञानिक महत्व है। गोबर और गौमूत्र आधारित जैविक उत्पाद कृषि में रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता को कम करते हैं और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण संतुलन में भी गौवंश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गौसंरक्षण केवल भावनात्मक या धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है। यदि देश में जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है तो गौसंरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी।
गौभक्तों ने केंद्र सरकार से मांग की कि गौवंश के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए, जिसमें निम्न प्रमुख बिंदु शामिल हों—सभी राज्यों में गौशालाओं को मजबूत करना, सड़क पर घूम रहे गौवंश का पुनर्वास, गौपालन को आर्थिक रूप से प्रोत्साहन देना, और गौ आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना। इसके साथ ही गौसंरक्षण को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई।
इस दौरान गौभक्तों ने यह भी कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने से देश में गौसंरक्षण के प्रति एक मजबूत संदेश जाएगा और समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। उनका कहना था कि यह कदम न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी देश को लाभ पहुंचाएगा।
अभियान के दौरान उपस्थित सदस्यों ने बताया कि यह आंदोलन केवल एक दिन का नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला जनजागरण अभियान है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोगों को गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि अभियान के तहत पहले से ही हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इन हस्ताक्षरों की प्रतियां भी ज्ञापन के साथ उपजिलाधिकारी को सौंपी गईं, ताकि इसे उच्च स्तर तक पहुंचाया जा सके।
इस मौके पर संत कमल भारतीय, शांति स्वरूप, बाबा पागलदास, आशीष आर्य, सुशील शर्मा, शेरसिंह, सोनू सेंगर सहित अनेक गौभक्त और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि गौसंरक्षण के लिए अब समय आ गया है कि सरकार ठोस कदम उठाए और इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए।
गौभक्तों ने अंत में यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रभावी नीति नहीं बनाई गई तो गौवंश की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मांग को गंभीरता से लेते हुए गौमाता के संरक्षण और सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाएगी।

