• डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के सेवानिवृत्त प्रोफेसर को राज्यपाल ने दी बड़ी जिम्मेदारी
• पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद्, तीन दशक से अधिक का शैक्षणिक अनुभव
• केंद्रीय पुस्तकालय से लेकर राष्ट्रीय संगठनों तक रहा उल्लेखनीय योगदान
आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. उमेश चंद्र शर्मा को माननीय राज्यपाल महोदया द्वारा विश्वविद्यालय की कार्य परिषद का सदस्य नामित किया गया है। यह नियुक्ति विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। डॉ. शर्मा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र के अनुभवी शिक्षाविद् हैं और उन्होंने लगभग तीन दशक से अधिक समय तक उच्च शिक्षा, शोध और पुस्तकालय प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में प्रोफेसर एवं मानद पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में सेवाएं प्रदान की हैं। इस दौरान उन्होंने पुस्तकालय व्यवस्था को आधुनिक बनाने, अध्ययन सामग्री के विस्तार, शोध संसाधनों को बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया। उनके प्रयासों से विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनी।
उन्होंने पुस्तकालय के डिजिटलीकरण और सूचना संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके कार्यकाल में पुस्तकालय को केवल अध्ययन केंद्र ही नहीं बल्कि शोध एवं ज्ञान के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए गए। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देने के लिए उन्होंने विभिन्न अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
डॉ. शर्मा केवल विश्वविद्यालय स्तर तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि वे अनेक राष्ट्रीय स्तर के पुस्तकालय संगठनों से भी जुड़े रहे। इन संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में नीतिगत सुधार, तकनीकी उन्नयन और नई व्यवस्थाओं को लागू करने के लिए निरंतर प्रयास किए। उनके कार्यों को विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर सराहा गया और उन्हें एक अनुभवी विशेषज्ञ के रूप में पहचान मिली।
इसके अतिरिक्त वे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने इस प्रक्रिया में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए विश्वविद्यालय की गुणवत्ता सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान से मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में सहायता मिली।
शैक्षणिक योगदान के साथ-साथ डॉ. शर्मा ने हमेशा शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध कार्यों के लिए प्रेरित किया और पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया। उनके मार्गदर्शन में अनेक शोधार्थियों ने अपने कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
उनकी कार्यशैली में अनुशासन, अनुभव और नवाचार का संतुलन देखने को मिलता रहा है। वे सदैव विद्यार्थियों और सहकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनके लंबे अनुभव ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
राज्यपाल द्वारा उन्हें कार्य परिषद का सदस्य नामित किए जाने से विश्वविद्यालय के निर्णय लेने की प्रक्रिया को और अधिक अनुभवी एवं सशक्त नेतृत्व मिलने की उम्मीद है। शैक्षणिक जगत में इस नियुक्ति को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे और शिक्षा गुणवत्ता दोनों को नई दिशा मिलने की संभावना है।

