वेबसाइट पर फीस, परिवहन, गतिविधियों और स्टाफ का पूरा ब्यौरा अनिवार्य
आरटीई के तहत चयनित बच्चों को तुरंत प्रवेश न देने पर सख्त कार्रवाई
बिना परमिट व फिटनेस वाले वाहनों से बच्चों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित
आगरा। जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने निजी स्कूलों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि फीस, यूनिफॉर्म, किताबों और परिवहन व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरटीई के तहत चयनित बच्चों को तत्काल प्रवेश, स्कूल वेबसाइट पर सभी जानकारी अपलोड करना और बिना परमिट वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे अहम फैसले लिए गए। नियमों के उल्लंघन पर एफआईआर, जुर्माना और मान्यता निरस्त करने तक की चेतावनी दी गई।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने की। बैठक में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 और उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने सभी विद्यालय संचालकों और प्रिंसिपलों को निर्देश दिए कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्कूल फीस का पूरा विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करें। इसके साथ ही शैक्षणिक भ्रमण, परिवहन शुल्क, व्यक्तिगत गतिविधियों के शुल्क, प्रिंसिपल का संपर्क नंबर, स्कूल वाहनों के ड्राइवरों का पूरा विवरण, वाहनों के परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र समेत सभी दस्तावेज अपलोड किए जाएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना समिति की अनुमति कोई नया शुल्क लागू नहीं किया जाएगा और फीस वृद्धि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर नियमानुसार ही की जा सकेगी। हर वर्ष यूनिफॉर्म बदलने की प्रवृत्ति पर भी सख्ती दिखाई गई और कहा गया कि अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। स्कूलों द्वारा लोगोयुक्त यूनिफॉर्म की मोनोपोली खत्म करने और बाजार में उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि छात्र-छात्राओं के पास पुरानी किताबें उपलब्ध हैं तो उन्हें नई किताबें खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए। साथ ही पाठ्यक्रम में अनावश्यक पुस्तकें जोड़ने पर रोक लगाई गई। कक्षा 1 से 8 तक और उच्च कक्षाओं के लिए अलग-अलग परिसर बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के छात्र-छात्राओं द्वारा वाहन चलाकर स्कूल आने पर संबंधित प्रिंसिपल की जवाबदेही तय होगी। इसके लिए अभिभावकों को पैरेंट्स मीटिंग में चेतावनी देने और सुधार न होने पर वाहन नंबर सहित जिला समिति को सूचित करने के निर्देश दिए गए।
आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने और अभिभावकों को दस्तावेज सत्यापन के नाम पर परेशान करने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि पहले बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और बाद में औपचारिकताएं पूरी की जाएं। प्रवेश से इनकार करने वाले स्कूलों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

स्कूल परिवहन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। सभी स्कूलों को अपने वाहनों की 100 प्रतिशत फिटनेस सुनिश्चित करने, जीपीएस ट्रैकिंग लगाने और बच्चों को सुरक्षित चढ़ाने-उतारने के लिए स्टाफ नियुक्त करने को कहा गया। ड्राइवरों के लाइसेंस, अनुभव और सभी वैध दस्तावेज अनिवार्य रूप से वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना परमिट वाले वाहनों में बच्चों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यदि अभिभावक निजी वाहन किराए पर लेते हैं तो उसके लिए परमिट लेना अनिवार्य होगा। बिना परमिट या फिटनेस वाले वाहनों से आने वाले बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा और यदि दिया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की होगी।
विद्यालय स्तर पर परिवहन सुरक्षा समिति के गठन और शैक्षणिक सत्र में कम से कम चार बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इसकी निगरानी के लिए संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी, मान्यता रद्द की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
मीटिंग में सीडीओ प्रतिभा सिंह, एडीएम सिटी यमुनाधर चौहान,डीआईओएस चंद्रशेखर, बीएसए जितेंद्र गोंड एवं सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य, निजी संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

