डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में वरिष्ठ नागरिकों पर जागरूकता सत्र
नाट्य प्रस्तुति और इंटरएक्टिव सत्र ने भावनात्मक रूप से जोड़ा
विशेषज्ञों ने पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल पाठशाला पर विस्तार से चर्चा की
आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के गृह विज्ञान संस्थान द्वारा राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) के सहयोग से “वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु अंतरपीढ़ी संबंध” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गृह विज्ञान संस्थान, स्वामी विवेकानंद परिसर, खंदारी के हॉल नंबर 4 में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे स्वागत सत्र के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कार्यक्रम का संचालन किया और निदेशक प्रो. अचला गक्खड़ तथा संयोजक प्रो. अर्चना सिंह के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विकास संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ होम साइंस, आई.ई.टी., दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट के छात्र-छात्राएँ, शिक्षकगण, शोधार्थी और समुदाय के अन्य सदस्य शामिल थे।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा की प्रोफेसर डॉ. रेनु अग्रवाल ने “वरिष्ठ नागरिकों के पोषण एवं शारीरिक स्वास्थ्य में अंतरपीढ़ी सहयोग प्रणाली” विषय पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं में उम्र बढ़ने के साथ बदलाव आता है और इसमें परिवार के युवा सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, दवाओं का समय पर सेवन और भावनात्मक सहयोग बुजुर्गों के समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने परिवार में पीढ़ियों के बीच सहयोग की भावना को बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।
द्वितीय सत्र में डॉ. प्रीति यादव के निर्देशन में छात्राओं द्वारा “खाली आंगन की पुकार” शीर्षक से नाट्य प्रस्तुति दी गई। इस नाटक में बुजुर्गों के अकेलेपन, उपेक्षा और भावनात्मक आवश्यकताओं को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
तृतीय सत्र में आरबीएस कॉलेज, आगरा की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधु बाला ने “वरिष्ठ नागरिकों के मनोवैज्ञानिक कल्याण हेतु अंतरपीढ़ी संबंध” विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों का विघटन और व्यस्त जीवनशैली बुजुर्गों में अकेलेपन, तनाव और अवसाद बढ़ा रही है। युवाओं द्वारा बुजुर्गों के साथ समय बिताना, उनकी बात सुनना और उनके अनुभवों का सम्मान करना उनके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।
अंतिम सत्र में तरुण श्रीवास्तव, इंजीनियरिंग असिस्टेंट, कम्युनिटी रेडियो, डीबीआरएयू और डॉ. प्रिया यादव ने संवादात्मक सत्र का संचालन किया। इस दौरान ‘बुजुर्गों के लिए डिजिटल पाठशाला’ पर विशेष जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच बुजुर्गों की समस्याओं, सामाजिक भूमिका और पीढ़ीगत सामंजस्य पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। विद्यार्थियों ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और उनके प्रति जिम्मेदारी की नई समझ मिली। नाट्य प्रस्तुति और इंटरएक्टिव सत्र विशेष रूप से प्रभावशाली रहे। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बुजुर्गों के प्रति सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता बढ़ सके।
विशेष विवरण: कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और अंतरपीढ़ीगत संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. नेहा सक्सेना, डॉ. दीप्ति सिंह, डॉ. कविता सिंह, ज्योति पाल, काजल, मेघा और आयोजन समिति के सभी सदस्यों ने सफल आयोजन में योगदान दिया। डॉ. संघमित्रा गौतम और डॉ. नेहा अग्रवाल भी उपस्थित रहीं। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रश्मि शर्मा द्वारा दिया गया।

